जिहादी राणा अय्यूब के घृणास्पद ट्वीट्स हटाने के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश
‘सांप्रदायिक और भड़काऊ है…’, राणा अय्यूब के किस पोस्ट पर नाराज हुआ HC?
दिल्ली हाई कोर्ट ने राणा अय्यूब के X पोस्ट को सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाला बताया है। उन्हें उस पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है।
Rana Ayyub
कथित पत्रकार राणा अय्यूब।
‘सांप्रदायिक है’, राणा अय्यूब के किस पोस्ट पर नाराज हाई कोर्ट?
कथित पत्रकार राणा अय्यूब की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में हिंदू देवी देवताओं के लिए अपमानजनक, सांप्रदायिक नफरत फैलने वाले और भारत विरोधी बयानों को सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दिया है। राणा अय्यूब पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया है, भारत के खिलाफ बयान दिया है।
जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव की अदालत में इस केस की सुनवाई चल रही थी। कोर्ट में अमिता सचदेवा ने एक याचिका दायर कर ने अदालत से मांग की थी कि बयान अपमानजक है, भड़काऊ है और सांप्रदायिक संवेदनशील है। अदालत ने याचिका पर केद्र सरकार, X प्रशासन, दिल्ली पुलिस और राणा अय्यूब का जवाब मांगा है। उन्हे अपना जवाब गुरुवार को अदालत में देना होगा।
याचिका किस बारे में है?
राणा अय्यूब के कुछ पुराने X पोस्ट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है। अमिता सचदेव ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि इनके पोस्ट, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ रहे हैं, भड़काऊ हैं और नफरत फैलाते हैं। आरोप भारत विरोधी होने के भी हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अब दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि इस मामले के सभी दस्तावेज एक्स कॉर्पोरेशन को भेज दें। कोर्ट ने कहा कि राणा अय्यूब के ट्वीट्स बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं। इन्हीं पोस्ट के आधार पर एक निचली अदालत पहले ही उनके खिलाफ एफआईआर अंकन का आदेश दे चुकी है। कोर्ट ने कहा है कि इसलिए इस मामले में तुरंत कार्रवाई जरूरी है।
अगली सुनवाई कब?
मामला शुक्रवार को फिर सुनवाई को लिस्ट हुआ है। याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा ने आरोप लगाया है कि राणा अय्यूब ने साल 2013 से 2017 के बीच 6 ट्वीट्स में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया, वीर सावरकर और भारतीय सेना को बदनाम किया।
कैसे यहां तक पहुंची बात?
अमिता सचदेवा ने पहले पहले नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की थी। पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने ट्रायल कोर्ट में धारा 156(3) CRPC में आवेदन किया। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि धारा 153ए, 295ए और 505 IPC में प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, इसलिए FIR अंकन हो।
अब अमिता सचदेवा ने हाई कोर्ट में नई याचिका दायर कर इन ट्वीट्स को डिलीट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक्स के ग्रीवांस अपीलेट कमिटी ने भी राहत देने से मना कर दिया था। यह मामला अदालत में लंबित है।
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में कहा गया है कि IT रूल 2021 में सभी उपाय आजमा लिए गए हैं, फिर भी ये X पोस्ट, दुनिया भर में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ रहा है और अदालत के आदेशों का कोई असर नहीं पड़ रहा है। पुलिस ने पहले निचली अदालत को बताया था कि राणा अय्यूब के अकाउंट और ट्वीट्स की डिटेल्स X से मांगी गई हैं, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया है। अमिता सचदेवा का कहना है कि राणा अय्यूब लगातार सोशल मीडिया पर हिंदू देवताओं का अपमान करती रही हैं। वह भारत की एकता को नुकसान पहुंचाती हैं। भारतीय सेना और देश के खिलाफ दुश्मनी फैलाती हैं।
अदालत ने शहर की पुलिस को पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) अंकन का निर्देश दिया है। वकील का आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर “भारत विरोधी भावना” फैलाई और हिंदू देवी-देवताओं का “अपमान” किया।
दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि अय्यूब के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (धर्म के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और 505 (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान) में एफआईआर अंकित है।
साकेत न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु रमन सिंह ने 25 जनवरी के अपने आदेश में कहा, “तथ्यों और परिस्थितियां देखते हुए, शिकायत में संज्ञेय अपराधों का अनावरण हुआ है, जिसके लिए एफआईआर अंकन आवश्यक है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) में प्रस्तुत आवेदन स्वीकार किया जाता है। दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश है कि वे शिकायत की सामग्री को एफआईआर में परिवर्तित कर मामले की निष्पक्ष जांच करें।”
मजिस्ट्रेट ने आरोपों की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “आरोपों की गंभीरता देखते हुए, न्यायालय का यह मत है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) में न्यायिक शक्ति का प्रयोग करते हुए इस मामले में जांच का आदेश देना उचित है। शिकायतकर्ता के बताए तथ्य ऐसे हैं जिनके लिए पुलिस जांच के रूप में राज्य तंत्र के हस्तक्षेप की आवश्यकता है और शिकायतकर्ता साक्ष्य एकत्र करने की स्थिति में नहीं होगा।”
यह शिकायत अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने दायर की थी, जिनका अदालत में प्रतिनिधित्व वकील मकरंद अडकर, यादवेंद्र सक्सेना और विक्रम कुमार ने किया। सचदेवा ने X पर अय्यूब की कई पोस्ट प्रस्तुत कीं, जिनमें से कुछ 2013, 2014, 2015 और 2022 की हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार ने भगवान राम का “अपमान” किया है, रावण का “महिमामंडन” किया है, सीता और द्रौपदी को “अपमानजनक” ढंग से चित्रित किया है, और एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को “आतंकवादी समर्थक” बताया है।
नवंबर में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद, सचदेवा ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। 


इसके बाद, उसने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) में अदालत में याचिका दायर कर पुलिस जांच का अनुरोध किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित पत्रकार राणा अयूब को हिन्दू देवी-देवताओं और स्वतंत्रता सेनानी वीडी सावरकर को लेकर एक्स पर किए गए आपत्तिजनक टिप्पणी पर जवाब माँगते हुए 2013 और 2017 के बीच भारत विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदू देवी-देवताओं और विनायक दामोदर सावरकर पर कई ट्वीट ‘आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक’ थे। कोर्ट ने अय्यूब को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और अगली सुनवाई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मामले पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है और इस पर 10 अप्रैल को सुनवाई होगी।
जस्टिस पीके कौरव ने सुनवाई में कई ट्वीट पर सवाल उठाते हुए कहा, “प्रतिवादी राणा अयूब को निर्देश लेने दें और जरूरी काम करने दें। उन्हें कल तक जवाब फाइल करने दें। मामले पर परसों सुनवाई हो। प्रतिवादी राणा अय्यूब के बहुत ज़्यादा अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक ट्वीट्स को देखते हुए यह कार्रवाई जरूरी है। एक सक्षम कोर्ट के आदेश पर FIR अंकित हुई है। मामले पर तुरंत विचार की जरूरत है। दिल्ली पुलिस को भी पार्टी बनाया जाए।”
वकील अमिता सचदेवा ने ये अर्जी हाईकोर्ट में दाखिल की थी। इससे पहले साकेत कोर्ट में उन्होंने आपराधिक मुकदमा दायर कर अयूब के खिलाफ कड़े एक्शन की माँग की थी। वकील सचदेवा की अर्जी के बाद ट्रायल कोर्ट ने अयूब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जाँच का आदेश दिल्ली पुलिस को दिया था। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा कि ट्वीट अब एक्स पर मौजूद नहीं है।
हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान का आरोप
सचदेवा का कहना है कि अय्यूब के ट्वीट्स ने हिंदू देवताओं, सीता- राम, वीर सावरकर का अपमान किया और ‘भारत विरोधी’ भावनाओं को भड़काया।
सचदेवा ने कहा, “ट्वीट्स पढ़ने के बाद जो सनातन धर्म को मानने वाला है, वह बहुत दुखी हुआ होगा, क्योंकि पोस्ट में हिंदू देवताओं का अपमान किया गया। स्वंत्रतता संग्राम में अहम योगदान देने वाले शख्सियतों का अपमान किया गया था और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला था।”
अपनी पिटीशन में, सचदेवा ने 2013 और 2017 के बीच अय्यूब के किए गए 6 ट्वीट्स का जिक्र किया।
अय्यूब के 2013 के ट्वीट में लिखा था, “रावण ने सीता को छुआ तक नहीं, जबकि वह छू सकता था। राम सीता के लिए खड़े नहीं हुए, जबकि उन्हें होना चाहिए था। रावण 1 राम 0।”
अक्टूबर 2014 में, अय्यूब ने अली सरदार जाफरी का एक शेर कोट किया था, जिसमें लिखा था, “गरीब सीता के घर पे कब तक रहेगी रावण की हुक्मरानी, द्रौपदी का लिबास उसके बदन से कब तक छीना करेगा”।
इसके अलावा 2015 में, अय्यूब ने सावरकर के बारे में ट्वीट किया।
उसने लिखा, “तो वीर सावरकर ने हिंदुत्व राष्ट्रवाद के एक जरूरी हिस्से के तौर पर रेप की वकालत की।”
सावरकर पर एक और ट्वीट में अय्यूब ने कहा, “नाथूराम गोडसे का सावरकर के बारे में लिखा हुआ पढ़ रहा था और सोच रहा था कि क्या हमें आतंकवादी समर्थक का सम्मान करते रहना चाहिए।”
अय्यूब ने 2016 में एक लड़के की तस्वीर के साथ एक ट्वीट पोस्ट किया। बच्चे के चेहरे पर चोट के निशान थे।
ट्वीट में लिखा था, “प्रिय भारतीय सेना, मुझे लगता है कि यह छोटा बच्चा भारत की आजादी को इतना बड़ा खतरा था कि उसे जिंदगी भर को अँधा कर दिया गया।”

