प्रीह विहिहर मंदिर के लिए थाईलैंड और कंबोडिया में भीषण युद्ध
शिव मंदिर के लिए थाईलैंड और कंबोडिया में चल रहे तोप-गोले, युद्ध में अब चीन निभाएगा महत्वपूर्ण रोल?
11वीं सदी का प्रीह विहिहर मंदिर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध की वजह बना हुआ है. इस मंदिर को 11वीं सदी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन ने भगवान शिव के लिए बनवाया था. लेकिन वक्त के साथ ये मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रवाद, राजनीति और सैन्य ताकत का अखाड़ा बन गया है. इस मंदिर में आज भी शिवलिंग है. जो इस मंदिर का केंद्र है.
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जंग छिड़ गई है
इस 10वीं सदी के मंदिर के लिए दोनों देश भिडे हुए हैं
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2025, ऐसा लग रहा है कि जैसे साल 2025 युद्ध का साल है. सिर्फ 7 महीने में दुनिया ने तीन युद्ध देख लिए हैं. पहले भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ, फिर इजरायल और ईरान के बीच युद्ध हुआ और अब थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लड़ाई शुरू हो गई है. गुरुवार की सुबह से ही थाईलैंड और कंबोडिया की सेनाएं, एक-दूसरे पर बड़े हमले कर रही हैं. कंबोडिया ने थाईलैंड के सीमावर्ती इलाकों में रॉकेट से हमले किए और इसके जवाब में थाईलैंड की वायुसेना ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए.
ये लड़ाई उत्तरी कंबोडिया और थाईलैंड सीमा पर हो रही है. थाईलैंड के सुरीन और सीसाकेट राज्य इस युद्ध से प्रभावित हुए हैं. कंबोडिया और थाईलैंड के बीच जंग की असली वजह इसी क्षेत्र से जुड़े एक ऐसे विवाद से है, जो हिंदू धर्म से जुड़ा है. सबसे पहले समझते हैं कि दोनों देशों में अचानक युद्ध क्यों और कैसे शुरू हो गया. गुरुवार सुबह थाईलैंड की सीमा में कंबोडिया के ड्रोन ने युद्ध की चिंगारी का काम किया.

गुरुवार सुबह साढ़े 7 बजे थाईलैंड के सैनिकों को सुरीन के एक मंदिर ‘Ta Muen Thom’ (ता मुएन थॉम) के ऊपर कंबोडियाई सेना का ड्रोन दिखा. इसके बाद 6 कंबोडियाई सैनिक थाईलैंड के मिलिट्री बेस के पास देखे गये. ये कंबोडियाई सैनिक हथियारों से लैस थे जिनके पास ग्रेनेड चलाने वाले लॉन्चर्स थे।
कंबोडिया के थाईलैंड पर ताबड़तोड़ हमले, तस्वीरों में
इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच इस भड़काऊ कदम को लेकर बहस शुरू हो गई, और उसके बाद करीब साढ़े 8 बजे कंबोडियाई सैनिकों ने थाईलैंड के मिलिट्री ठिकाने पर फायरिंग शुरू कर दी. थाईलैंड का आरोप है कि करीब 9 बजे कंबोडियाई सेना ने उनके ‘ता मुएन थॉम’ मंदिर पर हमला कर दिया, जिसके बाद हालात ज्यादा खराब हो गए. इस फायरिंग में थाईलैंड के कुछ सैनिक घायल हो गए, जिसके बाद थाईलैंड ने कंबोडिया पर बड़े हमले किए. कंबोडिया ने अपने रॉकेट हमलों से सुरीन के मंदिर को ही नहीं बल्कि ‘सी सा केट’ राज्य के Don Tuan (डॉन ट्वान) मंदिर को भी निशाना बनाया. थाईलैंड का दावा है कि कंबोडियाई सैनिक जानबूझकर मंदिरों और रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहे हैं.
थाईलैंड-कंबोडिया के बीच चल रहे तोप-गोले
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जमकर तोप-गोले चल रहे हैं. कंबोडिया का कहना है कि हमले की शुरुआत थाईलैंड ने की, जबकि थाईलैंड का दावा है कि उनकी सीमा में रॉकेट और तोपों से हमला हुआ और जवाब में थाईलैंड ने एफ-16 विमानों से कंबोडिया के सैन्य ठिकाने टारगेट किये. अब आपको इस युद्ध की असली वजह बताते हैं.
11वीं सदी का प्रीह विहिहर मंदिर थाईलैंड और कंबोडिया में युद्ध का कारण बना है, ये मंदिर कंबोडिया के प्रीह विहार प्रांत और थाईलैंड के सिसाकेत प्रांत की सीमा पर स्थित है. 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी (ICJ) ने फैसला दिया कि ये मंदिर कंबोडिया का है, लेकिन मंदिर के आसपास की 4.6 वर्ग किलोमीटर जमीन पर दोनों देश अपना दावा करते हैं.
थाईलैंड का कहना है कि ये जमीन उसकी है, जबकि कंबोडिया इसे अपना हिस्सा मानता है. बता दें कि इस मंदिर को 11वीं सदी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन ने भगवान शिव को समर्पित किया था. लेकिन समय के साथ ये मंदिर सिर्फ आस्था केंद्र नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रवाद, राजनीति और सैन्य ताकत का अखाड़ा बन गया है. इस मंदिर में आज भी शिवलिंग है. मंदिर में भगवान शिव के द्वारपाल भी देखे जा सकते हैं जो भक्तों की मनोकामना शिव जी तक पहुंचाते हैं
दोनों देशों में कब शुरू हुआ विवाद?
ये विवाद 1907 में कंबोडिया के शासक फ्रांस ने एक नक्शा बनाया, जिसमें मंदिर कंबोडिया में दिखाया गया. थाईलैंड ने इस नक्शे को कभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. 2008 में कंबोडिया ने मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बनवाया, तब विवाद और बढ़ गया, क्योंकि थाईलैंड ने इसका विरोध किया. इसके बाद 2008-2011 तक दोनों देशों की सेनाओं में कई बार झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग मारे गए.
थाईलैंड-कंबोडिया युद्ध में बड़ा रोल निभाएगा चीन?
कंबोडिया के पास एक ढंग का फाइटर जेट तक नहीं है. अब थाईलैंड की एयरस्ट्राइक कैसे झेलगा. कहा जा रहा है कि अगर जंग नहीं रुकी तो इसमें बड़ा रोल चीन निभा सकता है, वैसे तो चीन के रिश्ते कंबोडिया और थाईलैंड दोनों से ही अच्छे हैं, लेकिन चीन की थाईलैंड से गहरी आर्थिक साझेदारी है. चीन ने थाईलैंड को हथियार भी बेचे हैं. तो क्या चीन अब कमज़ोर कंबोडिया पर कहर
कैसे एक मंदिर को लेकर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शुरू हुआ सैन्य संघर्ष
कंबोडिया के सैनिक बीएम-21 रॉकेट लॉन्चर और तोप जैसे भारी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर चल रही सैन्य झड़प में अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 लोग घायल हो गए हैं.थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि झड़पों में एक सैन्यकर्मी और 11 नागरिक मारे गए हैं. जबकि दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर पहली गोली चलाने का आरोप लगाया है.
यह घटना तब हुई जब एक दिन पहले सीमा पर एक लैंडमाइन विस्फोट में एक थाई सैनिक घायल हुआ था, जिसके बाद थाईलैंड ने कंबोडिया से अपना राजदूत वापस बुला लिया था.
सीमा पर गुरुवार सुबह से ही दोनों देशों के सैनिकों में गोलीबारी हो रही है. थाईलैंड ने कहा है कि उसने कंबोडिया के सैन्य ठिकाने पर हवाई बमबारी की है.गुरुवार सुबह फ़ायरिंग शुरू हुई तो दोनों पक्षों ने एक दूसरे पहली गोली चलाने के आरोप लगाए ।
थाईलैंड ने कंबोडिया पर थाई गांवों और अस्पतालों पर रॉकेट दागने के आरोप लगाए हैं जबकि थाईलैंड ने कंबोडिया के कुछ ठिकानों पर हवाई बमबारी की है.
कंबोडिया ने थाईलैंड से अपने राजनयिक संबंध घटा दिया है और उस पर अननुपातिक बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आपात बैठक बुलाने की मांग की है.
चीन ने दोनों देशों से बातचीत से विवाद समाधान की अपील की और दोनों देशों में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका प्रस्तावित की है.
कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय का आरोप

कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये झड़प तब शुरू हुई जब थाई सैनिकों ने एक विवादित क्षेत्र में मंदिर के पास कंटीले तार लगा दिये।
कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, गुरुवार सुबह का संघर्ष स्थानीय समयानुसार, करीब 6.30 बजे तब शुरू हुआ जब थाई सैनिकों ने पहले के समझौते का उल्लंघन करते हुए सीमा के पास स्थित एक हिंदू मंदिर की ओर बढ़त बनाई और उसके चारों ओर कंटीली तार लगा दी.
इसके बाद थाई सैनिकों ने 7 बजे एक ड्रोन छोड़ा और 8.30 बजे हवाई फ़ायरिंग की.
कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेटा ने ‘फनम पेन्ह पोस्ट’ अख़बार को बताया कि 8.46 बजे थाई सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिससे कंबोडियाई सैनिकों के पास आत्मरक्षा के अलावा विकल्प नहीं बचा.सोचेटा ने थाईलैंड पर अत्यधिक सैनिक तैनात करने, भारी हथियारों के इस्तेमाल और कंबोडियाई क्षेत्र पर हवाई हमले करने का भी आरोप लगाया.कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने कहा है कि उनके पास जवाबी कार्रवाई करने के आलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.
एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, “कंबोडिया सभी मुद्दों को बातचीत से हल करने के सिद्धांत को मानता रहा है लेकिन इस हालत में सैन्य आक्रामकता का जवाब सैन्य ताक़त से देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.”
थाईलैंड का पक्ष क्या है?
विवादित खमेर मंदिर के पास निगरानी करता एक थाई सैनिक
थाईलैंड की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ने बताया कि गुरुवार सुबह स्थानीय समयानुसार 7:30 बजे कंबोडिया की सेना ने सीमा के पास थाई सैनिकों पर निगरानी रखने को ड्रोन तैनात किए.इसके थोड़ी देर बाद, आरपीजी से लैस कंबोडियाई सैनिक सीमा पास इकट्ठा हुए. थाई पक्ष के सैनिकों ने बातचीत की कोशिश की और चिल्लाकर संवाद की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास असफल रहा.
प्रवक्ता ने बताया कि 08:20 बजे कंबोडियाई सैनिकों ने गोलीबारी शुरू की, जवाब में थाई सैनिकों को भी कार्रवाई करनी पड़ी.थाईलैंड ने कंबोडिया पर बीएम-21 रॉकेट लॉन्चर और तोपखाने समेत भारी हथियार तैनात करने का आरोप लगाया है.थाई पक्ष का कहना है कि इस हमले से सीमा के पास बसे घरों और सार्वजनिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है.
कंबोडिया थाईलैंड सीमा तनाव का इतिहास
थाईलैंड के कुछ गांव रॉकेट हमले की चपेट में आए हैं.इस विवाद की जड़ें सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी हैं, जब फ्रांसीसी कब्ज़े के बाद कंबोडिया की सीमाएं तय की गई थीं.हालात 2008 में तब औपचारिक रूप से तनावपूर्ण हो गए, जब कंबोडिया ने एक विवादित क्षेत्र में 11वीं सदी के मंदिर को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के तौर पर पंजीकृत कराने की कोशिश की.
थाईलैंड ने इसका तीखा विरोध किया. इसके बाद दोनों देशों में कई बार झड़पें हुईं, जिनमें सैनिकों और सामान्य नागरिकों की मौतें हुईं.हालिया तनाव मई में तब और बढ़ गया, जब एक झड़प में कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई. तब से दोनों देशों के रिश्ते एक दशक में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए.
पिछले दो महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीमा संबंधी पाबंदियां लगाई हैं. कंबोडिया ने थाईलैंड से फल-सब्ज़ी जैसी चीज़ों के आयात पर रोक लगाई, साथ ही बिजली और इंटरनेट सेवाएं लेना भी बंद कर दिया. कुछ हफ्तों में दोनों देशों ने सीमा पर सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा दी है.
थाईलैंड और कंबोडिया दोनों में नेतृत्व पहले जैसा प्रभावशाली नहीं है.
पत्रकार जोनाथन हेड का कहना है कि कोई नहीं मानता कि यह टकराव पूरी तरह युद्ध में बदल जाएगा, लेकिन अभी दोनों देशों में ऐसा नेतृत्व नहीं दिखता जो इस तनाव को कम करने की ताक़त और आत्मविश्वास रखता हो.
कंबोडिया में अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है. वहां के प्रधानमंत्री, पूर्व सत्ताधारी नेता के बेटे हैं और अभी तक उनकी खुद की कोई ठोस राजनीतिक पकड़ नहीं बनी है. उनके पिता हुन सेन अब भी प्रभावशाली हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि वह इस संघर्ष को और आगे बढ़ाने को तैयार हैं ताकि अपने राष्ट्रवादी रुख़ को और मज़बूत दिखा सकें.
थाईलैंड की ओर देखें तो वहां एक अस्थिर गठबंधन सरकार है, जिसके पीछे ताक़तवर नेता ताकसिन शिनावात्रा हैं. उनका और हुन सेन के परिवार के बीच गहरा व्यक्तिगत रिश्ता है, लेकिन हुन सेन के एक निजी बातचीत को सार्वजनिक करने के बाद उन्हें धोखा महसूस हुआ. इसी लीक से उनकी बेटी और प्रधानमंत्री पिंटोन्गताकूना कॉर्नवॉन्ग को संवैधानिक अदालत ने निलंबित कर दिया. ऐसे में थाई पक्ष में काफ़ी नाराज़गी है.
अब देखना होगा कि क्या आसियान के अन्य सदस्य इस टकराव में हस्तक्षेप करते हैं और दोनों देशों को तनाव कम करने को मनाते हैं. आसियान का उद्देश्य ही अपने सदस्य देशों में टकराव टालना रहा है और इस समय यह कुछ सदस्य देशों की प्राथमिकता होगी कि वे थाईलैंड और कंबोडिया में विवाद सुलझवाएं.

