ज्ञान:एक ही नही होते बैरिस्टर, लॉयर और एडवोकेट
Lawyer, Advocate,Barrister में क्या फर्क होता है? दोनों को एक समझने वाले अंतर जान लें
Interesting Facts: आप भी Lawyer और Advocate को एक ही समझते हैं? अगर ऐसा है तो फिर बता दें कि आप गलत समझते आए हैं। आइए बताते हैं कि दोनों के बीच में क्या अंतर है?
12वीं की परीक्षा पास करने के बाद लोग अलग-अलग प्रोफेशन में चले जाते हैं। कोई इंजीनियरिंग का रास्ता चुनता है तो कोई डॉक्टर बनने का फैसला लेता है। कोई पत्रकार बनने की तरफ आगे बढ़ता है तो कोई वकील बनने को LLB करने का फैसला करता है। आपके भी ग्रुप में या फिर संपर्क में शायद कोई वकील होगा ही और आज हम आपको इसी प्रोफेशन से जुड़ी एक ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देगी। दरअसल कई सारे लोग ऐसे हैं जो Lawyer और Advocate को एक ही समझते हैं।
Lawyer और Advocate में क्या फर्क होता है?
आप अगर Lawyer और Advocate को एक ही समझते आए हैं तो यह भ्रम दूर करें और इन दोनों शब्दों का अंतर बताया जाए। बता दें कि Lawyer शब्द काफी सामान्य प्रकृति का है और इसका इस्तेमाल कानूनी पेशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को दर्शाने को किया जाता है जिसमें सॉलिसिटर, बैरिस्टर और अटॉर्नी शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ Advocate एक योग्य व्यक्ति होता है जो अदालत में अपने वादी का प्रतिनिधित्व करता है और मामले की प्रकृति के आधार पर क्षतिपूर्ति या रिहाई की पैरवी करता है।
आसान भाषा में कहें तो कोई भी आदमी जिसके पास LLB की डिग्री है, वो Lawyer कहलाता है लेकिन Advocate वही आदमी होता है जो बार काउंसिल में पंजीकृत होता है । इसके लिए उसे ‘ऑल इंडिया बार परीक्षा’ पास करना होता है।
Lawyer अदालत में केस नहीं लड़ सकता
बता दें कि एक Lawyer का काम और उसकी जिम्मेदारी अपने वादी को कानूनी सलाह देना होता है। वो अदालत में जाकर उनका केस नहीं लड़ सकता है क्योंकि वो बार काउंसिल में पंजीकृत नहीं होते हैं। वहीं एक Advocate के पास कानूनी मामलों में व्यापक ज्ञान, अनुभव और कौशल होता है, इसलिए वे अदालत जाकर अपने क्लाइंट का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं क्योंकि वो बार काउंसिल में पंजीकृत होते हैं।
लॉयर, एडवोकेट और बैरिस्टर: क्या है तीनों का अंतर? ज्यादातर लोग रहते हैं कन्फ्यूज
विधि संसार की बात करते हैं तो- लॉयर एडवोकेट और बैरिस्टर जैसे शब्द सामने आते हैं। सुनने में ये तीनों एक जैसे लगते हैं । इसी से कई लोग इनमें अंतर नहीं कर पाते। क्या आप भी उनमें से एक हैं? तो चलिए आज इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं और समझते हैं कि आखिर इन तीनों में क्या फर्क है।
कई लोग लॉयर, एडवोकेट और बैरिस्टर जैसे शब्दों को एक समझते हैं।
कानूनी जगत से जुड़े ये तीनों नाम अपनी अलग-अलग पहचान रखते हैं।
शुरुआती पढ़ाई एक जैसी होते हुए भी इन तीनों में काफी अंतर होता है।
अगर आपसे कोई पूछे कि लॉयर, एडवोकेट और बैरिस्टर में क्या फर्क है (Lawyer, Advocate and Barrister Difference), तो क्या आप बिना झिझक जवाब दे पाएंगे? दरअसल, ज्यादातर लोग इन शब्दों को एक ही समझते हैं और सोचते हैं कि ये सब वकील के ही दूसरे नाम हैं, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग और दिलचस्प है। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि इन तीनों में आखिर क्या अंतर है (Legal Professionals Difference) और क्यों यह जानना जरूरी है।
1) लॉयर (Lawyer)
‘लॉयर’ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल उन सभी लोगों के लिए किया जाता है जिन्होंने कानून की पढ़ाई की है यानी जिन्होंने एलएल.बी (LLB) की डिग्री हासिल की है। चाहे वह अदालत में केस लड़े या न लड़े, अगर किसी ने कानून की पढ़ाई की है तो वह ‘लॉयर’ कहलाता है।
उदाहरण: कोई व्यक्ति LLB की डिग्री लेने के बाद किसी कंपनी में लीगल एडवाइजर बन जाता है, तो वह ‘लॉयर’ है, भले ही वो कोर्ट में केस न लड़े।
2) एडवोकेट (Advocate)
जब कोई लॉयर, बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवा लेता है और उसे केस लड़ने की अनुमति मिल जाती है, तो वह ‘एडवोकेट’ बन जाता है।
एडवोकेट कौन होता है?
जिसने कानून की पढ़ाई पूरी कर ली हो
जिसने बार काउंसिल ऑफ इंडिया में नामांकन किया हो
जो अदालत में अपने क्लाइंट की ओर से दलील दे सकता हो
सीधी भाषा में कहें तो, हर एडवोकेट एक लॉयर होता है, लेकिन हर लॉयर जरूरी नहीं कि एडवोकेट भी हो।
3) बैरिस्टर (Barrister)
‘बैरिस्टर’ शब्द ब्रिटिश लीगल सिस्टम से आया है। जब कोई भारतीय छात्र इंग्लैंड जाकर कानून की पढ़ाई (विशेषतः ‘बार एट लॉ’) करता है, तो उसे ‘बैरिस्टर’ कहा जाता है। हम सभी जानते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बैरिस्टर की पढ़ाई करने 19 साल की उम्र में भारत से लंदन गए थे। यानी लॉयर और बैरिस्टर एक ही होते हैं, नाम को देशों भारत और इंग्लैंड का अंतर है।
बैरिस्टर बनने को:
इंग्लैंड की किसी इनर टेम्पल, मिडल टेम्पल, ग्रेज इन या लिंकन इन से प्रशिक्षण लेना होता है
वहां की बार काउंसिल से मान्यता लेनी होती है
भारत में आज भी कई वरिष्ठ वकीलों के नाम के आगे ‘बैरिस्टर’ लिखा होता है, क्योंकि उन्होंने इंग्लैंड से शिक्षा ली होती है।
क्यों कन्फ्यूज रहते हैं लोग?
लोग इन तीनों नामों को लेकर इसलिए कन्फ्यूज रहते हैं, क्योंकि आम बोलचाल में इन शब्दों को आपस में मिला देते हैं। कई बार फिल्में और टीवी शो भी इनका गलत इस्तेमाल करते हैं, जिससे भ्रम और बढ़ जाता है, लेकिन जब आप इनके मूल अर्थ को समझते हैं, तो फर्क साफ हो जाता है।

