UK पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस:कोई वीआईपी नही,उर्मिला का पता नही तो सुरक्षा कैसे?
आखिरकार पुलिस ने भी अंकिता भंडारी हत्याकांड के उस राज से पर्दा उठा दिया, जिसको लेकर इन दिनों प्रदेश में हंगामा मचा हुआ है.
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देहरादून 04 जनवरी 2026 : उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, उस पर मीडिया ने आज तीन जनवरी शनिवार को पौड़ी के पूर्व एएसपी और एसआईटी सदस्य रहे शेखर सुयाल से सवाल किए. उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कई अहम जानकारी दी और उर्मिला सनावर द्वारा लगाए गए आरोपों का भी विस्तार से जवाब दिया. साथ ही वीआईपी का नाम भी खोला.
अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया गया था, जिसके सदस्य तत्कालीन पौड़ी अपर पुलिस अधीक्षक शेखर सुयाल भी थे.
शेखर सुयाल ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एसआईटी ने की थी, उस जांच को हाईकोर्ट और सुप्रीम ने सही करार दिया था.
शेखर सुयाल का कहना है कि एसआईटी जांच सही दिशा में थी, तभी तीनों आरोपियों को कोर्ट ने दोषी पाया था और उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी. आज भी तीनों दोषी जेल में बंद हैं. शेखर सुयाल की मानें तो एसआईटी ने वनंत्रा रिजॉर्ट में एक-एक सबूत जुटाए और उसे कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई और जांच सही दिशा में गई.
वीआईपी का सच भी बताया: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में सबसे ज्यादा बात वीआईपी की हो रही है. वीआईपी का सच क्या है? इसको भी शेखर सुयाल ने विस्तार से बताया. शेखर सुयाल वर्तमान हरिद्वार के एसपी ग्रामीण हैं, लेकिन वो अंकिता भंडारी हत्याकांड केस में शुरुआत से जुड़े हुए हैं.
घटना से दो दिन पहले अंकिता का दोस्त उससे मिलने आया था: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि यह घटना 18 सितंबर 2022 की है. जब तीनों आरोपियों ने एक प्लान बनाते हुए राजस्व चौकी में पटवारी के पास अंकिता की मिसिंग कंप्लेंट दर्ज कराई थी. यह भी सच है कि अंकिता का दोस्त जो जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है, वो भी घटना से दो दिन पहले यानी 15 और 16 सितंबर को अपने एक दोस्त के साथ रिजॉर्ट में आया था. इसलिए आरोपियों ने ऐसा बताने की कोशिश की थी कि अंकिता अपने दोस्त के साथ चली गई है. इस तरह अगले दिन अंकिता की गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज होता है.
अंकिता भंडारी के तीनों हत्यारों को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी.
आरोपियों ने बनाया था सिनेरियो: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि जांच के दौरान वो जो समझ पाए, उसके अनुसार आरोपियों ने इस तरह का एक सिनेरियो बनाने की कोशिश कि की 18 सितंबर 2022 की रात को अंकिता रिजॉर्ट में उनके साथ वापस आई थी और 19 सितंबर सुबह को वो बिना बताए चली गई. आरोपी अपने स्टाफ और अंकिता के परिजनों को ऐसा दिखाने का प्रयास कर रहे थे कि अंकिता अपने उन दोस्तों के साथ चली गई है, जो दो दिन पहले उससे मिलने आए थे. शुरुआती जांच भी इस दिशा में की गई.
22 सितंबर को पुलिस के पास आया केस: अंकिता के उस दोस्त का नाम पुष्पदीप है. अंकिता की गुमशुदगी के बाद उसके माता-पिता और आशुतोष नेगी भी लगातार पुष्पदीप के संपर्क में थे. इसी तरह 20 से 21 सितंबर तक पुष्पदीप ने अंकिता के परिजनों को कुछ जानकारी दी और बताया कि उसके पास अंकिता की कुछ चेटिंग है. 22 सितंबर को ये केस पुलिस को हेडओवर हुआ.
इसके बाद पुलिस ने आरोपितों से पूछताछ शुरू की और उस बारे में जानकारी ली, जो उस समय एक्स्ट्रा सर्विस की बात कही जा रही थी. इसके अलावा सोशल मीडिया पर और भी कई बातें चल रही थी. वहीं कुछ जानकारियां पुष्पदीप ने भी पुलिस को दी थी.
18 सितंबर की रात को 9 बजे हुए अंकिता की हत्या: पुलिस अधीक्षक शेखर सुयाल के मुताबिक आखिर में आरोपितों ने कबूल किया कि वो अंकिता से एक्स्ट्रा सर्विस की मांग कर रहे थे, जिसके लिए वो तैयार नहीं थी. 18 सितंबर की रात को 9 बजे के करीब अंकिता का फोन परमानेंट बंद हो गया था, इसलिए माना जा रहा है कि वो ही घटना का टाइम है. इसके बाद आरोपितों ने बताया कि उन्होंने कैसे अंकिता को गंगा में धक्का देकर मारा. पुलिस की जांच में भी सभी बातें सही पाई गई यानि आरोपितों का प्लान फुलप्रूफ था.
तथ्यों से नहीं हुई छेड़छाड़, सबूत भी नहीं मिटे: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि 22 सितंबर को ये केस पुलिस को हैंडओवर हुआ और उस दिन शाम को लक्ष्मण झूला थाने से आईओ (Investigating Officer) रिजॉर्ट गया और उस कमरे को सील कर दिया, जिसमें अंकिता रहती थी. 23 सितंबर को सुबह 9 बजे एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) की टीम रिजॉर्ट पहुंची. एफएसएल टीम ने अंकिता के पूरे कमरे की वीडियो रिकॉर्डिग की. साथ ही वहां से सभी साक्ष्य और सबूत एकत्र किए.

अंकिता भंडारी हत्या का मामला सामने आने के बाद रिसॉर्ट को जेसीबी से तोड़ा गया था.
पुलिस अधीक्षक शेखर सुयाल ने कहा कि ये बात इसलिए बताई जा रही है कि क्योंकि बार-बार कहा जा रहा है कि सबूतों को नष्ट किया गया है, ऐसा कुछ नहीं हुआ है. उन ही सबूतों और रिकॉर्डिग को ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया और हाईकोर्ट में जो याचिका लगाई गई थी, वहां भी दिखाया गया. आखिर में इस बेस पर तीनों आरोपी दोषी साबित हुए और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा भी सुनाई.
आरोपियों की चैट में आया था वीआईपी का जिक्र: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि किस तरह उन्होंने इस केस में एसआईटी टीम में रहकर जांच की. जांच के दौरान ही गिरफ्तार आरोपियों में से दो दोस्तों के बीच एक चैट से वीआईपी का भी जिक्र आया, जिसके बाद एसआईटी टीम ने अंकिता के दोस्त से पूछा तो उसने भी बताया था कि 16 सितंबर को रिजॉर्ट में एक व्यक्ति सुरक्षाकर्मियों के साथ था, जिसका पूरा हुलिया भी दोस्त ने बताया.
इस बात को रिजॉर्ट के स्टाफ ने भी कंफर्म किया, जिसके आधार पर एसआईटी टीम में नोएडा में रहने वाले धर्मेंद्र उर्फ प्रधान नाम के व्यक्ति तक पहुंची, जिनसे एसआईटी टीम ने बातचीत की और उनके बयानों को पुलिस ने विवेचना में शामिल किया.
शेखर सुयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जब एसआईटी टीम ने जब धर्मेंद्र उर्फ प्रधान से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वह किसी जमीन के सिलसिले में इस क्षेत्र में पहुंचे थे और कुछ देर को रिजॉर्ट में खाना खाने को रुके थे, जिस पर एसआईटी ने क्रॉस चेक किया. धर्मेंद्र उर्फ प्रधान की बताई गई सभी बातें सही पायी .
शेखर सुयाल ने बताया कि इसके बाद भी डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच कर रही एसआईटी टीम ने रिजॉर्ट में घटना से पहले आने वाले लोगों को भी चेक किया कि वह किस दिन आए थे, किस लिए आए थे और कब तक रुके रहे. इस पर एसआईटी टीम ने पूरी जांच की, जिसमें यह पाया गया कि नोएडा में रहने वाला व्यक्ति एक जमीन के सिलसिले में किसी से मिलने पहुंचा था और उसे व्यक्ति के द्वारा रिजॉर्ट में खाने के लिए लाया गया था. उन्होंने कहा कि इसके अलावा सोशल मीडिया में जितने भी नाम आ रहे थे. उन पर भी एसआईटी टीम ने अपनी जांच की, लेकिन कुछ भी सामने नहीं आया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड, पुलिस ने उठाया VIP के राज से पर्दा, बताया उस रात का सच

अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया एवं कुछ माध्यमों पर निरंतर भ्रामक सूचनाएँ, आधे-अधूरे तथ्य एवं निराधार आरोप प्रसारित किए जा रहे हैं। इन्हीं परिस्थितियों के दृष्टिगत उत्तराखण्ड पुलिस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित कर पूरे प्रकरण से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया गया है।
उत्तराखण्ड पुलिस ने स्पष्ट रूप से अवगत कराया है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में किसी भी प्रकार का कोई वीआईपी संलिप्त नहीं है। इस तथ्य को न्यायालय ने भी स्पष्ट रूप से स्वीकार किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, दो व्यक्तियों की कथित बातचीत से संबंधित वायरल ऑडियो को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा तत्काल SIT का गठन किया गया, जो इस विषय में विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कर रही है।
न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों, SIT की गहन विवेचना एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस प्रकरण में तीनों अभियुक्तों को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार के साक्ष्य न तो नष्ट किए गए हैं और न ही छिपाए गए हैं। जिस कमरे को लेकर बार-बार यह भ्रम फैलाया गया कि उसे साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से तोड़ा गया, उस कमरे की वीडियोग्राफी सहित समस्त आवश्यक साक्ष्य तीनों न्यायालयों में विधिवत रूप से प्रस्तुत किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ही कुछ ही घंटों के भीतर सभी आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई थी और वे आज भी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में निरुद्ध हैं। तथाकथित वीआईपी एंगल सामने आने के पश्चात् पुलिस ने रिसोर्ट/होटल में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन जांच की। विस्तृत विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि जिस प्रकार की अफ़वाहें फैलाई गईं, वैसा कोई वीआईपी इस प्रकरण में शामिल नहीं है।
SIT ने रिसोर्ट में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी से पूछताछ की और सभी के बयान विधिवत रूप से अंकित कर न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। पुलिस की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं विधिसम्मत जांच का ही परिणाम है कि तीनों अभियुक्त आज भी जेल में हैं।
पुलिस रिमांड में अभियुक्तों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” देने का दबाव बनाया। अंकिता के इसके लिए सहमति न देने पर आरोपितों ने यह जघन्य अपराध किया। कर्मचारियों से पूछताछ में यह भी पुष्टि हुई कि अंकिता मानसिक रूप से परेशान थी तथा वह वहां से जाना चाहती थी, किंतु आरोपित उसे जबरन अपने साथ ले गये। किसी भी कर्मचारी ने अंकिता के सुरक्षित वापस लौटने की पुष्टि नहीं की ।
अभियुक्तों ने रिमांड में बताए गए स्थान की निशानदेही के आधार पर ही शव ढूंढा गया, जो पूरी तरह से विधिसम्मत प्रक्रिया में ढूंढा गया ।
उर्मिला सनावर के फेसबुक लाइव एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग से पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ सहित अन्य व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों और अंकिता भंडारी प्रकरण से संबंधित कथनों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने अलग से SIT का गठन किया है। इस संबंध में स्पष्ट किया गया है कि उर्मिला सनावर को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें जांच में सहयोग को नोटिस जारी किया गया है, जिसका अभी तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
उर्मिला सनावर ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है, परंतु उनके प्रस्तुत पत्र में कोई स्पष्ट पता अंकित नहीं है। पुलिस ने उनसे अपील की है कि वे जांच में सहयोग हेतु पुलिस के समक्ष उपस्थित हों। यदि उन्हें किसी भी प्रकार के जान-माल के खतरे की आशंका मिली, तो उन्हें पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। वर्तमान में उनके विरुद्ध कोई वारंट जारी नहीं किया गया है।
मार्च 2025 के एक पुराने प्रकरण में उनके विरुद्ध हाल ही में सम्मन जारी हुआ है, जिसका अंकिता भंडारी प्रकरण से कोई संबंध नहीं है।
अंत में, उत्तराखण्ड पुलिस ने मीडिया एवं सामान्य जन से अपील की है कि यदि इस प्रकरण से संबंधित किसी भी व्यक्ति के पास कोई अतिरिक्त साक्ष्य अथवा जानकारी उपलब्ध है, तो वह आगे आकर पुलिस को उपलब्ध कराए, ताकि सत्य के आधार पर जांच को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
उत्तराखण्ड पुलिस पुनः यह स्पष्ट करती है कि अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच पूर्णतः निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है तथा किसी भी व्यक्ति को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।

