वोट मांगते TMC नेताओं में मेरलिन ग्रुप पर ED छापों से डर, पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी भी छापों से संकट में

बंगाल चुनाव के बीच TMC नेताओं की क्यों ‘घिग्घी बंधी’? वोट मांगने के समय ‘नाम आने के खौफ’ में कर रहे प्रचार, कहानी लंबी है
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच ठीक वोट मांगने के समय ED ने कोलकाता की मशहूर रियल एस्टेट कंपनी मेरलिन ग्रुप पर ताबड़तोड़ छापा मारा है. 8 अप्रैल 2026 को सुशील मोहता और साकेत मोहता की चलाई जा रही कंपनी के 7 ठिकानों पर ED की टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया है. फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी जमीन हड़पने और आम निवेशकों से करोड़ों ठगने का आरोप है. जांच में मेरलिन ग्रुप के TMC के कुछ वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों से कथित गठजोड़ भी सामने आया है. छापे में  महत्वपूर्ण प्रपत्र और डिजिटल डिवाइस मिले हैं. सूत्रों के अनुसार TMC नेता अब ED के रडार पर हैं. चुनावी सरगर्मी में यह कार्रवाई TMC की मुश्किलें बढ़ा रही है.

पश्चिम बंगाल में चुनावी वातावरण बहुत तेज है. 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में वोटिंग होनी है. TMC जोर-शोर से वोट मांग रही है, ममता बनर्जी रैलियां कर रही हैं, लेकिन ठीक इसी समय 8 अप्रैल को ED ने कोलकाता में मेरलिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर बड़ा हमला बोल दिया है. कंपनी के प्रमोटर सुशील मोहता और साकेत मोहता से जुड़े सात ठिकानों पर छापेमारी हुई है. ED का कहना है कि इन लोगों ने फर्जी कागजातों के सहारे सरकारी जमीन समेत कई प्लॉट हड़प लिए और फिर उन पर भव्य प्रोजेक्ट शुरू करके आम लोगों से भारी निवेश करवाया. आरोप है कि निवेशकों को पूरी तरह गुमराह किया गया है. सबसे बड़ी बात कि जांच में मेरलिन ग्रुप का TMC के कुछ बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों से कथित संबंध उजागर हुआ है. चुनाव के बीच यह खबर TMC कैंप में हाहाकार मचा रही है.  नाम न आए, घिघ्घी न बंधे, लेकिन ED का शिकंजा कसता जा रहा है.

कोलकाता में ED का शिकंजा, मेरलिन प्रोजेक्ट्स पर छापेमारी, जमीन घोटाले के आरोप.

बंगाल चुनाव 2026 के बीच ED का तूफानी छापा: मेरलिन ग्रुप के 7 ठिकानों पर दबिश!
चुनावी वातावरण में हर कोई वोट की बात कर रहा है, लेकिन 8 अप्रैल 2026 को ED ने कोलकाता और आसपास मेरलिन ग्रुप के सात ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला दिया. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) में हुई. टीम ने ऑफिस, घर और अन्य जगहों पर घंटों तलाशी ली. ED सूत्रों के अनुसार, छापे में कई महत्वपूर्ण कागजात, बैंक डिटेल्स, प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट और डिजिटल डिवाइस कब्जाये हैं. ये सब अब फॉरेंसिक जांच को भेजे जा रहे हैं. चुनाव से मात्र दो हफ्ते पहले केंद्रीय एजेंसी का यह एक्शन पूरे बंगाल में चर्चा का केंद्र  है. TMC कार्यकर्ता और नेता चुप्पी साधे हैं, क्योंकि कोई भी नाम सामने आने से पार्टी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने का खेल उजागर: निवेशकों के सपने चूर!
जांच में ED को पता चला कि सुशील मोहता, साकेत मोहता और उनकी कंपनियों ने फर्जी टाइटल चेन तैयार की. असली मालिकों को हटाकर खुद को जमीन का मालिक दिखाया गया. सरकारी जमीन भी इस घपले में शामिल बताई जा रही है. इन जमीनों पर बड़े-बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लॉन्च किए गए. लोग आकर्षक प्लान देखकर फ्लैट या प्लॉट बुक करते रहे. लाखों-करोड़ों जमा हुए, लेकिन कई प्रोजेक्ट अधर में लटक गए. ED का आरोप है कि फर्जी कागजात दिखाकर बैंक से लोन लिया गया और निवेशकों से पैसा जुटाया गया, जिसे बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए साफ किया गया. चुनाव के समय यह खुलासा उन हजारों परिवारों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई इस ग्रुप में लगाई थी.
TMC नेताओं की घिघ्घी बंध गई: ED रडार पर नाम न आए तो

मेरलिन ग्रुप केस की सबसे भयप्रद कड़ी यह है कि कंपनी का TMC के कुछ वरिष्ठ नेताओं और सरकारी अधिकारियों से गठजोड़ सामने आया है. ED सूत्र बता रहे हैं कि इन नेताओं से वित्तीय लेन-देन और भूमिका की गहराई से जांच हो रही है. क्या सरकारी मंजूरियां आसानी से मिलीं? क्या जमीन हड़पने में कोई संरक्षण मिला? ये सवाल अब हर तरफ गूंज रहे हैं. चुनाव में वोट मांगने का समय है, लेकिन ED का शिकंजा कसता देख TMC कैंप में हाहाकार मचा है. अभी कोई आधिकारिक नाम नहीं आया, लेकिन अंदरूनी सूत्र कह रहे हैं कि कुछ बड़े चेहरे जांच परिधि में आ चुके हैं. पार्टी का यह समय बेहद संवेदनशील है क्योंकि 23 अप्रैल से वोटिंग शुरु हो जायेगी।


​प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आठ अप्रैल को मर्लिन ग्रुप के चेयरमैन सुशील मोहता के आवास और कार्यालय सहित सात अन्य स्थानों पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की। मामला शहर के एक बड़े आवासीय प्रोजेक्ट के संबंध में जाली दस्तावेजों का उपयोग करके मालिकाना हक की फर्जी चेन बनाने से जुड़ा है।
​हालांकि ईडी के अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हैं, लेकिन पता चला है कि यह कार्रवाई फरवरी में मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर की गई है। शिकायत में कहा गया था कि सुशील मोहता, उनके बेटे साकेत मोहता, निदेशक और वरिष्ठ अधिकारी—जिनमें दिलीप चौधरी, विकास मेमानी, सौरव मजूमदार और रंजन चक्रवर्ती शामिल हैं—कई अन्य लोगों के साथ इस मामले में शामिल थे।
 शिकायत के अनुसार, आरोपित व्यक्तियों ने “मिलीभगत और संगठित तरीके से, उक्त संपत्ति (कोलकाता के आनंदपुर में 3.63 एकड़) पर धोखाधड़ी से एक गैर-मौजूद अधिकार और शीर्षक (title) तैयार किया। इसके लिए मूल्यवान प्रतिभूतियों, न्यायिक और सार्वजनिक दस्तावेजों के साथ जालसाजी की गई, ताकि शिकायतकर्ता के मालिकाना हक को समाप्त और आरोपियों के पक्ष में मालिकाना हक को झूठा दिखाया जा सके।”
​आनंदपुर निवासी शिकायतकर्ता मोहन चंद्र मंडल ने आरोप लगाया कि “जिन जाली दस्तावेजों का सहारा लिया गया है, वे साधारण फर्जी कागजात नहीं बल्कि कानून की दृष्टि में मूल्यवान प्रतिभूतियां (valuable securities) हैं। इनका उद्देश्य बहुत अधिक व्यावसायिक मूल्य वाली अचल संपत्ति पर मालिकाना हक बनाना और उसकी पुष्टि करना है। सार्वजनिक अधिकारियों, वैधानिक निकायों और वित्तीय संस्थानों के सामने इनका बार-बार असली के रूप में उपयोग किया गया।”
​उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “इन जाली दस्तावेजों के दम पर, आरोपियों ने खुद को उक्त संपत्ति का कानूनी मालिक बताया और वहां ‘मर्लिन नियासा’ (Merlin Niyasa) नामक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर निर्माण और व्यावसायिक दोहन शुरू कर दिया, जिसे आम जनता को एक वैध आवासीय परियोजना के रूप में बेचा जा रहा है।”
​शिकायत में कहा गया है: “सुशील मोहता ने जनता से जो पैसा इकट्ठा किया है, साथ ही उससे जो संपत्ति बनाई गई है, वह सीधे और परोक्ष रूप से जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के अपराधों से उत्पन्न हुई है। इसलिए प्रथम दृष्टया यह ‘मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002’ की धारा 2(1)(u) में ‘अपराध की कमाई’ (proceeds of crime) है।”
​इसी मामले में जनवरी में आनंदपुर थाने में एक प्राथमिकी (FIR) लिखी गई थी, जिसमें मोहता, उनके बेटे और अन्य पर धोखाधड़ी, जालसाजी, संगठित आपराधिक गतिविधि और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया था। इन अपराधों में पांच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
​मंडल, जो 1943 से चले आ रहे मालिकाना हक के आधार पर भूमि पर अपना दावा करते हैं, ने शुरू में आनंदपुर थाने में शिकायत की थी। लेकिन जब पुलिस ने प्रभावशाली मोहता परिवार (जिन्हें मेयर फिरहाद हकीम का करीबी बताया जाता है) के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने मामला दर्ज कराने को अदालत का दरवाजा खटखटाया।
​अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (दक्षिण 24 परगना) के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला (FIR संख्या 15/2026) दर्ज किया गया था।
​प्राथमिकी के अनुसार, मर्लिन ग्रुप ने अपने प्रवर्तकों सुशील मोहता और साकेत मोहता और विकास मेमानी जैसे प्रभावशाली अधिकारियों के माध्यम से, कई अन्य व्यक्तियों और कंपनियों के साथ मिलकर न्यायिक आदेशों और ‘कलकत्ता गजट’ सहित जाली प्रपत्र बनाकर संपत्ति अवैध रूप से हड़पी है।
​मंडल की शिकायत का मुख्य बिंदु 1959 के एक दीवानी मुकदमे में पारित कथित ‘समझौता डिक्री’ (compromise decree) है, जो जांच के बाद कथित तौर पर फर्जी और गैर-मौजूद पाई गई।
​आरोप है कि मोहता, मेमानी और अन्य आरोपियों ने इस दस्तावेज का बार-बार अदालतों, राजस्व अधिकारियों और नगर निकायों के सामने असली न्यायिक रिकॉर्ड के रूप में उपयोग किया, ताकि 600 करोड़ रुपये के ‘मर्लिन नियासा’ प्रोजेक्ट पर अपने अधिकार को सही ठहराया जा सके।
​मर्लिन पर ईडी की छापेमारी जारी, राजनीतिक संबंधों की जांच
​नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ ईडी अधिकारी ने बताया कि जांच से संकेत मिलता है कि सुशील मोहता, साकेत मोहता और अन्य ने कई भूमि खंडों का मालिकाना हक हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
​सुशील और साकेत मोहता ने ‘जाली दस्तावेजों’ से ‘हड़पी जमीन’
​ईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपितों ने कथित तौर पर भूमि के टुकड़ों पर स्वामित्व का दावा करने के लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग करके “स्वामित्व की झूठी श्रृंखला” (false chain of title) तैयार की, जिसके कारण उन पर जमीन हड़पने के आरोप लगे हैं।

मर्लिन ग्रुप (Merlin Group) कोलकाता की एक प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी है, जो बड़े पैमाने पर परियोजनाओं का विकास कर रही है। ग्रुप की वित्तीय स्थिति और निवेश संबंधी जानकारी इस प्रकार है:
बड़ी निवेश योजना: मर्लिन ग्रुप ने पश्चिम बंगाल में अगले 8 वर्षों में 8,000 करोड़ रुपये से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है।
परियोजनाओं का दायरा: कंपनी वर्तमान में लगभग 20,000 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है।
राजस्व लक्ष्य: समूह का लक्ष्य अगले 7-8 वर्षों में अपने राजस्व को दोगुना करना है, जिसके लिए वे 40 मिलियन वर्ग फुट का विकास कर रहे हैं।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स: ग्रुप ने फैशन टीवी (Fashion TV) के साथ मिलकर कोलकाता में 900 करोड़ रुपये की लागत से एक लग्जरी आवासीय परियोजना शुरू की है। इसके अलावा, साल्टलेक के सेक्टर-5 में 200 करोड़ रुपये की लागत से ‘द समिट’ नामक 28 मंजिला कमर्शियल इमारत बनाई जा रही है।
विस्तार: कोलकाता के अलावा, ग्रुप ने पुणे के रियल एस्टेट बाजार में 2,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है।

7 दिन पहले — मर्लिन ग्रुप कोलकाता के 35 लाख वर्ग फुट के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण पर 1500 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सुशील मोहता ने कहा कि मर्लिन ग्रुप निवेश करेगा, जबकि डब्ल्यूटीसीए लाइसेंस और ब्रांडिंग प्रदान करेगा।
मर्लिन ग्रुप ने भारत और श्रीलंका में 150 से अधिक परियोजनाएं पूरी की हैं, जिनमें डब्ल्यूटीसी कोलकाता और खेल-केंद्रित टाउनशिप मर्लिन राइज जैसी प्रतिष्ठित परियोजनाएं शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के घर ED की रेड, SSC घोटाले में एक्शन

पश्चिम बंगाल चुनावों के बीच ईडी भी एक्शन में आ गई है. ईडी ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास समेत दो ठिकानों पर रेड की है.

टीएमसी के पूर्व नेता और पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी.
पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा के बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का एक्शन जारी है. ईडी ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दो जगह छापेमारी की है. ईडी की टीम ने पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के घर और प्रसन्न कुमार रॉय के कार्यालय पर रेड की है. ईडी की टीम ने यह कार्रवाई एसएससी स्कैम से जुड़े मामले में की है.

जानकारी के मुताबिक ईडी प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के साथ एसएससी सहायक शिक्षकों की नियुक्ति, एसएससी ग्रुप सी और डी कर्मचारियों से जुड़े भर्ती घोटालों की जांच कर रही है. इन मामलों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी आरोपी हैं. ईडी ने पार्थ चटर्जी को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तीन बार समन जारी किए थे. बताया जाता है कि पार्थ चटर्जी ने इन समन की अवहेलना की.

पार्थ चटर्जी एक बार भी ईडी के सामने पेश नहीं हुए. इसके बाद अब ईडी ने उनके घर पर छापेमारी की कार्रवाई की है. ईडी की रेड प्रसन्न कुमार रॉय के कार्यालय पर भी चल रही है. प्रसन्न कुमार रॉय फिलहाल जेल में बंद हैं. ईडी ने पार्थ को भी गिरफ्तार किया था. पार्थ की गिरफ्तारी जुलाई 2022 में हुई थी और इस मामले में उन्हें पिछले साल (2025 में) फरवरी-मार्च में जमानत मिल गई थी.

ईडी की टीम ने पूर्व मंत्री के नाकतला स्थित घर पर रेड कर उनसे पूछताछ भी की. ईडी ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं. प्रसन्न कुमार के न्यूटाउन स्थित दफ्तर पर भी रेड हुई. प्रसन्न कुमार की गिनती पार्थ के करीबियों में होती है और इस स्कैम में प्रसन्न की भूमिका भी जांच के दायरे में है.

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