दिल्ली में भी TMC दोफाड़… 20 सांसदों का अलग गुट,NDA के समर्थन की घोषणा

अब दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस टूट गई. टीएमसी के 20 से ज्यादा सांसदों ने अलग गुट की घोषणा की है. विद्रोही गुट ने एनडीए समर्थन की बात भी कही है.

काकोली घोष और ममता बनर्जी. (फाइल फोटो)IANS

नई दिल्ली 10 जून 2026: बंगाल में चुनावी हार बाद ममता बनर्जी को झटके के बाद झटके लग रहे हैं. दिल्ली में भी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) टूट गई . टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग गुट का दावा किया है. इन सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान भी कर दिया है.

टीएमसी विद्रोही सांसद डॉक्टर शर्मिला सरकार ने बताया कि 20 सांसद अलग गुट बना एनडीए को सपोर्ट दे रहे हैं.  नए गुट की चीफ व्हिप काकोली घोष, जबकि शताब्दी घोष डिप्टी लीडर होंगी. विद्रोही  सांसद अब खुद को ही ‘असली टीएमसी’ भी बता रहे हैं. 20-21 सांसदों ने ‘असली टीएमसी’ का दावा किया है.

टीएमसी के विद्रोही सांसदों ने भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के घर पर बंद कमरे में बैठक की थी. बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी थे.

आगे क्या है योजना?

टीएमसी विद्रोही सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने वाले हैं. काकोली घोष ने कहा कि 20 सांसदों ने एनडीए समर्थन का फैसला लिया है. 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजकर एनडीए से गठबंधन की इच्छा जताई है.

उन्होंने यह भी कहा कि हमने बंगाल में चुनाव नतीजे स्वीकार कर लिये हैं और हमारा मानना है कि हमारी भविष्य की राजनीतिक दिशा एनडीए के साथ होनी चाहिए.

दो-तिहाई सांसदों ने किया विद्रोह 

बंगाल में विधानसभा में जैसे टीएमसी के दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों ने विद्रोह किया है. उसी तरह संसद में अलग गुट बनाने को दो-तिहाई सांसदों की ही जरूरत है.

संसद में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं. इनमें से दो-तिहाई यानी 20 सांसदों ने विद्रोह किया है. टीएमसी के विद्रोही सांसद लोकसभा स्पीकर से खुद को ‘असली टीएमसी’ की मान्यता को कहने वाले हैं.

कौन-कौन हैं विद्रोही?

चुनाव परिणामों से ही टीएमसी में विद्रोह के सुर उठे. पहले बंगाल विधानसभा में 60 से ज्यादा विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन खुला विद्रोह कर दिया. अब संसद में भी टीएमसी सांसदों ने विद्रोह कर दिया है.

विद्रोहियों के साथ 20 सांसद बताते हैं. इससे पहले 11 सांसदों ने भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के घर बैठक की थी, जिसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी थे.

बैठक करने वाले सांसदों में सुखेंदु शेखर रॉय के अलावा शताब्दी रॉय, काकोली घोष, अबू ताहिर, खलीलुर रहमान, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी और शर्मिला सरकार हैं.

ममता को कितना बड़ा झटका?

चुनावी हार बाद ममता बनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती पार्टी  बिखरने से बचाना था. लेकिन नतीजे आने के महीनेभर में ही पार्टी पूरी तरह टूट रही है.

विधायकों के बाद सांसदों के भी विद्रोह से ममता बनर्जी को पार्टी और सिबंल बचा पाना मुश्किल है. महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के उदाहरण देखे जाए तो बंगाल में अब ममता बनर्जी का टीएमसी बचा पाना मुश्किल होगा.

ममता बनर्जी के साथ-साथ यह विपक्ष को भी बड़ा झटका है. संसद में कांग्रेस के बाद सबसे बड़ी पार्टी टीएमसी ही थी. अब 20 सांसदों के एनडीए को समर्थन से संसद में विपक्ष कमजोर होगा.

TMC के 19 बागी सांसदों की लिस्ट जारी, यूसुफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा और सयोनी घोष का भी नाम

तृणमूल कांग्रेस के विद्रोही सांसदों की सूची आ गई है. इसमें युसूफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा और सयोनी घोष समेत 19 नाम हैं.

शत्रुघ्न सिन्हा, सयोनी घोष और यूसुफ पठान. (फाइल फोटो)IANSनई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल में चुनावी हार से तृणमूल कांग्रेस बिखर गई है. 60 से ज्यादा विधायकों के बाद टीएमसी सांसदों ने भी विद्रोह कर दिया है. इस बीच टीएमसी के 19 विद्रोही सांसदों की सूची आ गई है. इसमें युसुफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा और सयोनी घोष भी है. हालांकि, विद्रोही नेताओं का दावा था कि 20 से ज्यादा सांसद हैं. लेकिन इस सूची में 19 सांसद हैं.

19 बागी सांसदों की लिस्ट
काकोली घोष (बारासात)
जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
खली उर रहमान (जंगीपुर)
यूसुफ पठान, (बेहरामपुर)
अबू ताहिर खान, (मुर्शिदाबाद)
पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
बापी हलधर (मथुरापुर)
सयोनी घोष (जादवपुर)
माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
मिताली बाग (आरामबाग)
दीपक अधिकारी (घाटल)
कालीपद सोरेन (झालग्राम)
जून मालिया (मेदिनीपुर)
अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
डॉक्टर शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व)
शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
असित कुमार मल (बोलपुर)
शताब्दी रॉय (बीरभूम)
रचना बनर्जी (हुगली)

सयोनी घोष हैरान करने वाला नाम
सबसे ज्यादा हैरान नाम सयोनी घोष ने किया. बंगाल चुनाव में प्रचार में सयोनी घोष सबसे ज्यादा चर्चित रही थीं. वह जैसे रैलियों में भाषण दे रही थीं, उससे वे ममता बनर्जी का विकल्प बन रही थी.

सयोनी घोष जाधवपुर से लोकसभा सांसद हैं. 2021 में  तृणमूल कांग्रेस जॉइन की थी. 2021 में विधानसभा चुनाव हारी थीं, लेकिन इसके बावजूद अभिषेक बनर्जी ने उन्हें टीएमसी यूथ विंग राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था.

यूसुफ पठान और शत्रुघ्न भी हुए विद्रोही
ममता बनर्जी से विद्रोह करने वाले सांसदों में यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा भी है. युसुफ पठान बेहरामपुर तो शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल से लोकसभा सांसद हैं.

शत्रुघ्न सिन्हा कभी भाजपा में थे, फिर कांग्रेस और मार्च 2022 में टीएमसी में आए. 2022 में आसनसोल उपचुनाव में टीएमसी का टिकट मिला. 2024 में शत्रुघ्न सिन्हा ने दूसरी बार आसनसोल से लोकसभा चुनाव जीता.यूसुफ पठान का राजनीतिक करियर  टीएमसी से शुरु हुआ. 2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी से बेहरामपुर से टिकट मिला। उन्होंने कांग्रेस के बडे नेता अधीर रंजन चौधरी को 85 हजार वोटों से हराया था.

काकोली घोष हैं विद्रोहियों की नेता
10 से ज्यादा विद्रोही सांसदों ने कुछ दिन पहले भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की थी. इस मीटिंग में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी थे.

इसके बाद लगभग 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए का समर्थन जताया था. बागियों ने अलग गुट बनाने का दावा किया. बागी सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता चुना है.

काकोली घोष का कहना था कि वह ममता बनर्जी के साथ तब भी थीं, जब वह सत्ता में नहीं थीं. पहले नीतियां बंगाल के गरीबों के भले को थी लेकिन 3-4 सालों से आशानुरूप काम नहीं हो रहा था.

 

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बगावत के अगले दिन ही TMC सांसद को आई ममता बनर्जी की याद, बोलीं- दीदी, I Miss You
Jun 11, 2026 12:11 am IST
Devendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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West Bengal Politics: ममता बनर्जी की करीबी और पार्टी की वरिष्ठ नेता शताब्दी रॉय ने खुलकर बगावत का साथ दिया है। राजनीतिक रूप से बागियों के साथ खड़े होने का ऐलान करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि दीदी, मुझे आपकी बहुत याद आती है… भावनात्मक और नैतिक रूप से मैं गलत हूं।

बगावत के अगले दिन ही TMC सांसद को आई ममता बनर्जी की याद, बोलीं- दीदी, I Miss You
तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक विद्रोह की ज्वाला तेज होती जा रही है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद शताब्दी रॉय ने पहली बार खुलकर ममता बनर्जी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं और बागी गुट का राजनीतिक समर्थन करते हुए भी भावनात्मक रूप से खुद को गलत महसूस करने की बात कही है। एनडीटीवी से बात करते हुए शताब्दी रॉय ने कहा कि मुझे लगता है कि राजनीतिक रूप से मैंने सही निर्णय लिया है, लेकिन भावनात्मक और नैतिक रूप से मैं गलत हूं। उन्होंने आगे कहा कि दीदी, मुझे आपकी बहुत याद आती है।

बता दें कि शताब्दी रॉय को ममता बनर्जी ने राजनीति में लेकर आई थीं। वर्तमान में बागी मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार की उप-प्रमुख हैं। लोकसभा में 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की है, जिसका शताब्दी रॉय ने समर्थन किया है। उन्होंने साफ स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार और पार्टी की जनता से दूरी ही असली समस्या है। शताब्दी ने कहा कि ममता बनर्जी इस समस्या को स्वीकार करने से इनकार कर रही हैं, जिसके कारण कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।

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उन्होंने चुनाव परिणामों पर हुई निर्णायक बैठक का जिक्र करते हुए बताया कि हार के कारण सबके सामने थे, लेकिन ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया। दीदी ने कहा कि हम भाजपा से नहीं हारे,वे मुझे धमका रहे हैं। कोई विरोध नहीं कर सका। शताब्दी रॉय ने कहा कि पहले यह तो बताइए कि हम हारे क्यों? यह आई-पैक, अभिषेक बनर्जी और भ्रष्टाचार की समस्या है। लेकिन दीदी इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं। उस दिन मैंने फैसला कर लिया कि पार्टी कोई बदलाव नहीं चाहती।

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में विलय की संभावना जताई और कहा कि मुझे नहीं लगता कि कोई और विकल्प बचा है। अगर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो जाए तो बेहतर होगा। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ममता बनर्जी किसी भी पार्टी में नंबर दो की भूमिका में नहीं रह सकतीं। भावुक हो शताब्दी रॉय ने कहा कि मुझे ममता दीदी के लिए बुरा लगता है। मैं उनसे भावनात्मकता से जुड़ी हूं। मानना मुश्किल है कि मैं उनके साथ नहीं हूं। इस बार ममता बनर्जी की हालत बहुत खराब है।

विधानसभा चुनाव में करारी हार बाद तृणमूल कांग्रेस अपने विद्रोह से जूझ रही है। विधानसभा में 60 विधायकों ने ऋतब्रता बनर्जी का समर्थन किया,जो खुद को ‘असली तृणमूल’ बता रहे हैं। लोकसभा में 20 सांसदों ने एनडीए का साथ देने का ऐलान किया है। दो दिन पहले राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर राय ने त्यागपत्र दिया ,जबकि कल सुष्मिता देव ने भी तृणमूल कांग्रेस और राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी।

चर्चा है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं। लेकिन यह राह उतनी आसान नहीं है जितनी दिखती है। पार्टी में उठते विद्रोही सुरों ने पूरी प्रक्रिया जटिल कानूनी और संवैधानिक पहेली में बदल दिया है। पूरा घटनाक्रम , इसके ऐतिहासिक और कानूनी पहलु विस्तार से समझते हैं।

ममता बनर्जी और TMC का इतिहास: ‘हाथ’ का साथ छोड़कर कैसे खिलाया ‘जोड़ा फूल’?
ममता बनर्जी की राजनीतिक जड़ें कांग्रेस में ही रही हैं। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने एक युवा और आक्रामक कांग्रेसी नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। लेकिन 90 के दशक के मध्य आते-आते, ममता को लगने लगा कि राज्य में वामपंथियों (CPI-M) को हराने को कांग्रेस नेतृत्व पर्याप्त आक्रामकता नहीं दिखा रहा है। और फिर हुआ TMC का जन्म।

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