टारगेट ज्ञानेश कि राहुल? इंडी गठबंधन में हो क्या रहा है?
ज्ञानेश कुमार तो बहाना,राहुल की राजनीति है निपटाना… क्या है केजरीवाल-अखिलेश का सीक्रेट प्लान?
मोदी विरोधी इकोसिस्टम ने ज्ञानेश कुमार को लेकर वातावरण बनाया हुआ है.धरना प्रदर्शन,प्रोटेस्ट मार्च,हंगामा.. सब हो रहा है.कॉकरोच पार्टी भी नया मोर्चा खोले हुए हैं. अब देखें,कैसे ज्ञानेश कुमार तो सिर्फ बहाना है और नरेंद्र मोदी को नहीं,बल्कि असल में राहुल गांधी की राजनीति निपटने का ये पूरा खेल है. कैसे ये पूरा घमासान मचा हुआ है वो देखिए…
नई दिल्ली 04 अक्टूबर 2026 । ज्ञानेश कुमार का नाम आज सड़क पर है.धरना है,मार्च है,हंगामा है.कॉकरोच पार्टी नया मोर्चा खोले हुए है. केजरीवाल की टीम जंतर मंतर पर थी. कांग्रेस सफेद ड्रेस में थी. लेकिन सवाल ये कि क्या ज्ञानेश कुमार बहाना हैं. निशाना चुनाव आयुक्त नहीं, निशाना नरेंद्र मोदी की राजनीति को घेरकर राहुल गांधी की राजनीति निबटानी है. कल गांधी जयंती पर यही खेल दिल्ली और मुंबई में खेला गया, लेकिन पुलिस ने बिना इजाजत तमाशा नहीं चलने दिया और सुबह नया ऐलान आ गया.
कॉकरोचों ने घोषणा कर दी कि त्यागपत्र नहीं मिला तो 10 अक्टूबर को फिर जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगें यानी कल फेल हुए,आज तारीख आगे बढ़ा दी.उधर उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव कांग्रेस को उसकी सीमा बता रहे हैं.कांग्रेस 150 सीटें मांग रही है.लेकिन समाजवादी पार्टी कह रही हैं 150 तो दूर, 50 सीट देना भी बड़ी बात है. मतलब सड़क पर इंडी एकजुटता दिखा रहा हैं, लेकिन टेबल पर सीटों की लड़ाई है.
इंडी, कांग्रेस पार्टी, केजरीवाल, कॉकरोच पार्टी… कल ये जंतर मंतर पर तीन महीने पहला दृश्य दोहराना चाहते थे. अनुमति नहीं थी. नई दिल्ली में धारा 163 थी. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार मैदान पर थे और जिस-जिस ने हल्ला मचाया, सब बस में भरे गये.
उधर लेफ्ट छात्र संगठन भी जंतर मंतर जाने की कोशिश करने लगे.पिछली बार लेफ्ट छात्र संगठनों ने ही जंतर मंतर पर पूरा दृश्य रचा था,लेकिन इस बार लेफ्ट छात्र संगठनों ने हल्ला काटने की कोशिश की तो पुलिस ने उनका प्लान विफल कर दिया. जिसने भी जंतर मंतर पहुंच प्रदर्शन की जिद की, पुलिस ने टांगकर बस में भर रवाना कर दिया. छात्र नेता नेहा बोरा ने जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस से भिड़ने की कोशिश तो की लेकिन दिल्ली पुलिस ने अवसर नहीं दिया.ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र की मांग पर जंतर मंतर में प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने 3-3 FIR लिखी है. दो FIR दिल्ली के सांसद मार्ग थाने में है, जबकि दूसरी एक FIR क्नॉट प्लेस थाने में है.
दिल्ली में इंडी वाले टंगे तो शिवाजी पार्क में घबराहट दिखी. मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन शुरू हुआ. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र की मांग को लेकर अभिजीत दीपके ने डीसीपी की तुलना जनरल डायर से की. मंच ज्ञानेश के त्यागपत्र को था, लेकिन दीपके प्रधानमंत्री पर घटिया-घटिया बातें कर रहे थे.
यानी देखें, दिल्ली की तरह मुंबई पुलिस ने भी मार्च की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन फिर भी प्रदर्शन हुए. दिल्ली में कॉकरोच पैंतरा नहीं चला तो वो मुंबई पहुंच गए. लेकिन अब शिवाजी पार्क के प्रदर्शन पर एक और सवाल खड़ा है बच्चों को लेकर .
आरोप है कि एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठा कर भड़काऊ नारे लगाए गए.आरोप है कि बच्चों को प्रदर्शन में लाने की बात ग्रुप चैट में हुई थी,ताकि बच्चों को पुलिस कार्रवाई से बचने को ढाल बनाया जाए.शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने की. शिकायत में सोशल मीडिया के फोटो और वीडियो दिये गये.इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 में संज्ञान लिया . मामले की सुनवाई NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने की. आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर,इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय,सोशल मीडिया एक्स के शिकायत अधिकारी और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस दिया है.संबंधित एजेंसियों से 7 दिन में एक्शन रिपोर्ट मांगी गई है.उधर बिना अनुमति आंदोलन मामले में मुंबई पुलिस ने CJP के खिलाफ FIR लिखी है.
कल फेल हुए तो आज तारीख आगे बढ़ गई है. कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने रात घोषणा की. ज्ञानेश कुमार त्यागपत्र नहीं देते तो देश भर से लोग 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचेंगें. उन्होंने इसे जंतर मंतर 2.0 और चलो दिल्ली कहा…भाषा भले शांति की है,लेकिन तारीख दबाव की है.कल अनुमति नहीं थी.आज नई अनुमति मांगे बिना अगली तारीख घोषित.और इसके बीच चुनाव आयोग का एक फैसला भी है.जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका,वहां विशेष अभियान चलेगा.जिनका नाम सूची से बाहर हुआ वे फॉर्म 6 भर सकते हैं। पहली बार वोट डालने वाले युवा जुड़ेंगे। BLO हफ्ते में 20 से 25 घर जाएंगे….एक महीने का टारगेट.
चुनाव आयोग के अनुसार नाम जोड़ने का दरवाजा खुला है, लेकिन इंडी और कॉकरोज सड़क पर नाम काटने को लेकर बवाल कर रहे हैं. सड़क पर विपक्षी नेता एक मंच पर हैं, लेकिन वोटों के लेकर दरार है. कांग्रेस के अनुसार गठबंधन में कांग्रेस 50 प्रतिशत की अधिकारी है. 150 से कम सीट पर नहीं लड़ेंगें, लेकिन समाजवादी पार्टी 50 सीट लायक भी नहीं समझती. उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीट है और अखिलेश यादव की तैयारी 350 सीटों पर चुनाव लड़ने की है.
2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 37 सीटें जीती थी,जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें. अब अखिलेश यादव ने कांग्रेस को उसका वजन याद दिला दिया है.और असली खेल यही है. ज्ञानेश कुमार पर सड़क इसलिए गरम है क्योंकि राहुल गांधी को एक विषय चाहिए. लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव में अखिलेश यादव ने उन्हें दर्पण दिखा दिया है. प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर इंडी सड़क पर जितना ड्रामा करें, सीटों पर बिखरा हुआ है.
अब तीनों तस्वीरों को एक साथ जोड़ें. जंतर-मंतर पर बिना अनुमति कॉकरोच और केजरीवाल ने तमाशे की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सब भगा दिये. दबाव बढ़ाने को कॉकरोच ने तमाशा कर तारीख 10 अक्टबूर तक बढ़ा दी. मुंबई में कॉकरोच ज्ञानेश कुमार का त्यागपत्र मांगने पहुंचे , लेकिन प्रधानमंत्री पर बरस गए. असली खेल उत्तर प्रदेश में चल रहा है, जहां समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को उसकी सीमा दिखा दी है.
इन तीनों खबरों के केंद्र में कहीं भी ज्ञानेश कुमार नहीं है. ज्ञानेश कुमार के नाम पर कॉकरोच और इंडी प्रधानमंत्री मोदी को घेरने में लगे हैं. तमाशे की अगली तारीख 10 अक्टूबर तय हुई है, लेकिन अक्टूबर में उत्तर प्रदेश की बैठक बताएगी कि इन ड्रामे के सहारे इंडी लोगों को जोड़ पाता हैं कि खुद ही बिखर जाएंगा
.त्वरित प्रश्नोत्तर
ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर किस तारीख को दोबारा विरोध प्रदर्शन घोषित हुआ है?
ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को दोबारा विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किन-किन विभागों और अधिकारियों को नोटिस दिया है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के ग्रीवांस ऑफिसर और महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस दिया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में क्या चल रहा है?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी 150 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन समाजवादी पार्टी उन्हें 50 सीटें देने को भी तैयार नहीं है क्योंकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव की राज्य में 350 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।


