आशीष चौहान ने संभाला देहरादून जिलाधिकारी पद, दून बताया यात्रा का ट्रांजिट प्वॉइंट

देहरादून डीएम आशीष चौहान की ये रहेगी प्राथमिकताएं, जानिए क्यों हैं जनता के फेरवरेट अधिकारी
देहरादून को नया जिलाधिकारी मिल गया है. साल 2012 बैच के IAS अधिकारी आशीष चौहान नए डीएम बने हैं.

देहरादून जिलाधिकारी आशीष चौहान
देहरादून 25 मईङ2026 : अपनी शांत,सौम्य और बेहतरनीन कार्यशैली को पहचाने जाने वाले आईएएस आशीष चौहान ने देहरादून जिलाधिकारी का चार्ज संभाल लिया है.चार्ज संभालते ही उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी प्राथमिकता केवल दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटाने की नहीं,बल्कि जमीन पर उतरकर समस्याओं का समाधान करने की होगी.

निष्ठा और गंभीरता से जनता की पहली पसंद हैं आशीष चौहान: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को एक बार फिर ऐसा जिलाधिकारी मिला है,जिसकी पहचान सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नहीं,बल्कि ‘फील्ड अफसर’ के तौर पर होती रही है.IAS आशीष चौहान ने देहरादून DM का कार्यभार संभाल लिया.चार्ज संभालते ही उनका वही सहज,शांत और संतुलित अंदाज नजर आया, जिसके कारण उन्हें प्रशासनिक गलियारों में ‘मिस्टर कूल’ कहा जाता है.

आईएएस आशीष चौहान ने संभाला देहरादून जिलाधिकारी का चार्ज
साल 2012 बैच के IAS अधिकारी आशीष चौहान ने तेज तर्रार और मिलनसार होने के साथ ही अपनी ड्यूटी के प्रति निष्ठा एवं गंभीरता की वजह से जाने जाते हैं. उनके काम में अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पण भाव अक्सर साफ तौर पर देखा जाता रहा है. यही वजह है कि जहां भी जाते हैं. या यूं कहें जिस जिले की कमान संभालते हैं, वहां के लोगों के दिलों में बस उनके प्रिय बन जाते हैं.

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने गिनाई प्राथमिकताएं: देहरादून जिलाधिकारी  पदग्रहण के बाद आशीष चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ब्रीफिंग में कई महत्वपूर्ण प्राथमिकतायें स्पष्ट हैं. चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और देहरादून जिले के विकासनगर और ऋषिकेश जैसे क्षेत्र यात्रा रूट के महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वॉइंट हैं. ऐसे में यात्री सुविधा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य व्यवस्थायें बेहतर बनाए रखना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होगी.

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने ये भी स्पष्ट किया कि उनकी कोशिश किसी भी स्तर पर अनावश्यक पेंडेंसी न रहने देना रहेगी. सामान्य जन समस्यायें उसी स्तर पर तत्काल हल करने के मुख्यमंत्री के निर्देश हैं और प्रशासन उसी दिशा में काम करेगा. फाइलों के तेजी से निस्तारण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर उनका विशेष फोकस रहेगा.

जिलाधिकारी आशीष चौहान का स्वागत करते लोग
IIT से IAS तक की यात्रा: उत्तराखंड कैडर के 2012 बैच के IAS अधिकारी आशीष चौहान की प्रशासनिक यात्रा काफी रोचक रही है. वें IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर UPSC परीक्षा में 89वीं रैंक हासिल कर IAS बने.

सिविल सेवा के पहले उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में भी काम किया,लेकिन पहाड़ और समाज के लिए काम करने की सोच उन्हें प्रशासनिक सेवा तक लाई. उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि तकनीक की समझ होने के बावजूद उन्होंने हमेशा जमीनी प्रशासन को प्राथमिकता दी.

यही कारण है कि वे ‘फाइल से ज्यादा फील्ड’ वाले अधिकारी माने जाते हैं.पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य जन से सीधे संवाद, गांवों तक पहुंचना और स्थानीय भाषा में बातचीत, उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है.गढ़वाली बोलने में सहज आशीष चौहान को लोग’अपना अफसर’ मानते हैं.

जनता दरबार नहीं,जनता के द्वार की सोच: आशीष चौहान की कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान यह रही है कि उन्होंने प्रशासन को सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहने दिया. उत्तरकाशी जिलाधिकारी रहते वे हर शनिवार किसी न किसी दूरस्थ गांव में चौपाल लगाते थे.

ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनना और मौके पर अधिकारियों को निर्देश देना उनका स्वभाव रहा. इसी कारण कई वृद्ध आज भी उन्हें याद करते हैं कि ‘DM साहब खुद हमारे गांव आए थे.’

प्रशासनिक व्यवस्था में यह मानवीय दृष्टिकोण ही उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग पहचान देता है. माना जा रहा है कि देहरादून में भी उनकी यही कार्यशैली देखने को मिल सकती है, जहां जनता दरबार लगाने से ज्यादा प्राथमिकता जनता के बीच पहुंचने को दी जाएगी.
कठोर फैसले भी : आशीष चौहान केवल सौम्य छवि वाले अधिकारी ही नहीं,बल्कि जरूरत पड़ने पर कठोर फैसले लेने को भी जाने जाते हैं.साल 2022 में पिथौरागढ़ जिलाधिकारी रहते वे सुबह 6 बजे जिला अस्पताल पहुंचे थे,जहां 11 डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिले. मामला गंभीरता से ले उन्होंने तत्काल कार्रवाई की और सभी को सस्पेंड कर दिया.
हरिद्वार में ADM रहते कुंभ 2021 में सामने आए फर्जी कोविड टेस्ट रैकेट अनावरण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.इस मामले में कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी.उनकी यही कार्यशैली यही संदेश देती है कि वे लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर किसी तरह की ढिलाई पसंद नहीं करते.
आपदा प्रबंधन में भी दिखाई नेतृत्व क्षमता: उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती रहता है.आशीष चौहान ने अपने पिछले कार्यकालों में इस क्षेत्र में भी सक्रिय नेतृत्व दिखाया. साल 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में उन्होंने ग्राउंड जीरो पर काम किया.
तब मौलिक व्यवस्थायें दोबारा खड़ा करने और राहत कार्यों को गति देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई. वहीं, साल 2023 के जोशीमठ भू धंसाव संकट में भी वे लगातार 72 घंटे ग्राउंड पर डटे रहे और हजारों लोगों के सुरक्षित रेस्क्यू एवं पुनर्वास में प्रशासनिक नेतृत्व संभाला. उनके कार्यों की सराहना राष्ट्रीय स्तर तक हुई.

आईएएस आशीष चौहान ने उत्तरकाशी जिलाधिकारी रहते अपने कार्यकाल में कई ऐसे काम किए,जिसके लिए वे सदैव याद किए जायेंगें.उन्होंने आराकोट बंगाण क्षेत्र में 18 अगस्त 2019 को बादल फटने से आई आपदा में राहत बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. खुद हाथ में बेलचा लिए दिखे थे.

हर्षिल घाटी सेव को पहचान दिलाने को उन्होंने ‘एप्पल फेस्टिवल’ की नींव रखी.साथ ही उन्होंने जोशियाड़ा बैराज,मनेरी झील और चिन्यालीसौड़ में वाटर स्पोर्ट्स प्रोत्साहन को अथक प्रयास किए. साल 2019 में उत्तरकाशी जिले को आशीष चौहान के नेतृत्व में भारत सरकार पेयजल स्वच्छता,जलशक्ति मंत्रालय की ओर से ‘स्वच्छ भारत पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया.

आशीष चौहान के नाम पर रखा गया स्पेन में पहाड़ी का नाम: उत्तरकाशी से लौटे एक स्पेनिश नागरिक व पर्वतारोही जुआन एंटोनियो ने स्पेन की एक अनाम चोटी को आशीष चौहान के नाम पर करा दिया था.स्पेनिश नागरिक साल 2018 में जब उत्तराखंड आए थे,उन्होंने तब जिलाधिकारी आशीष चौहान से मदद मांगी थी.

तत्कालीन जिलाधिकारी आशीष चौहान ने न केवल उनकी मदद की, बल्कि उन्होंने पहाड़ की भौगोलिक स्थिति भी एंटोनियो को बताई थी.आशीष चौहान ने एंटोनियो को अपना मोबाइल नंबर भी दिया था.किसी तरह की परेशानी होने पर हर तरह की मदद का भरोसा भी दिलाया था.

वहीं,चोटी पर सफल आरोहण कर एंटोनियो ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया पेज पर साझा की थी. उस वर्जिन शिखर का नाम ‘मजिस्ट्रेट प्वाइंट’ और उस ट्रेक का नाम ‘वाया आशीष’ रखा गया. इस चोटी को पहली बार ट्रेक किया गया था.

इसके अलावा पौड़ी जिलाधिकारी रहते उन्होंने जिले के लिए कई काम किए.वहां भी आपदा में वे खुद ग्राउंड जीरो पर स्थिति का मूल्यांकन करते मिले थे. पीड़ितों से मिल कर उनकी समस्यायें सुनी.साथ ही क्षतिपूर्ति से लेकर पुनर्निर्माण कार्य किए.

देहरादून के नए जिलाधिकारी आशीष चौहान
टेक्नोलॉजी और विकास का मॉडल: आशीष चौहान की प्रशासनिक सोच में टेक्नोलॉजी और लोकल डेवलपमेंट का संतुलन भी साफ नजर आता है. चमोली में उन्होंने ‘हिम प्रहरी ऐप’ लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार और पलायन रोकने से जोड़ना था.

पिथौरागढ़ में ‘सीमांत सशक्तिकरण’ अभियान में चीन और नेपाल सीमा से लगे गांवों तक सड़क, मोबाइल नेटवर्क और शिक्षा सुविधाओं को पहुंचाने की दिशा में काम हुआ. वहीं, आदि कैलाश यात्रा को ऑनलाइन परमिट सिस्टम से जोड़ने के बाद पर्यटन और स्थानीय होम स्टे व्यवसाय को बड़ा लाभ मिला.

इसके अलावा उन्होंने ‘मेरा गांव-मेरा देश’ अभियान के जरिए युवाओं को गांव लौटकर स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. मशरूम खेती और पॉलीहाउस जैसी गतिविधियों से कई युवाओं ने रोजगार शुरू किया, जो आज भी जारी है.

देहरादून को क्या आशा? देहरादून लगातार बढ़ते ट्रैफिक, शहरी दबाव, जलभराव, अवैध निर्माण और जनसुविधाओं जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे में लोगों को आशा है कि आशीष चौहान की फील्ड आधारित कार्यशैली प्रशासन को ज्यादा सक्रिय बना सकती है.

चारधाम यात्रा, मानसून और राजधानी की शहरी समस्याओं में देहरादून प्रशासन के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं, लेकिन आशीष चौहान की अब तक की कार्यशैली संकेत देती है कि वे केवल बैठकों तक सीमित रहने वाले अधिकारी नहीं हैं.

कुल मिलाकर देहरादून को एक ऐसा जिलाधिकारी मिला है, जिसकी पहचान संवेदनशीलता, कठोर, जमीनी कनेक्शन और नवाचार के संतुलन से बनी है. अब देखने वाली बात होगी कि ‘मिस्टर कूल’ की यह कार्यशैली राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था में कितना बदलाव ला पाती है.

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