कासिम और चंद्रकांता का निकाह निरस्त,हाको ने वकील पर भी लगाया 25हजार अर्थदंड

Allahabad High Court Ruling Kasim And Chandrakanta Marriage Declared Fake Alleging Fraudulent Conversion
चंद्रकांता ने जैनब बनकर किया था कासिम से निकाह, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बताया फर्जी,धर्मांतरण के खेल की कहानी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लियम युवक और हिंदू लड़की की शादी को अमान्य घोषित कर दिया है। मामले में फर्जी धर्म परिवर्तन की बात सामने आई है।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम युवक और हिंदू युवती के बीच हुई शादी को अमान्य घोषित कर दिया है। हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में मुस्लिम युवक कासिम और हिंदू लड़की चंद्रकांता उर्फ जैनब परवीन की शादी को अवैध करार दिया। हाई कोर्ट ने माना कि यह विवाह फर्जी धर्म परिवर्तन प्रमाणपत्र के आधार पर हुआ था। इसलिए,इसे उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्मांतरण अधिनियम के तहत मान्यता नहीं दी जा सकती है। युवक-युवती के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि दोनों ने मुस्लिम कानून में शादी की। हालांकि,इस मामले में धर्म परिवर्तन का सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्था ने लड़की के धर्मांतरण सर्टिफिकेट गलत करार दिया।

क्या है पूरा मामला?
कासिम और चंद्रकांता ने हाई कोर्ट में सुरक्षा की मांग करते हुए दावा किया था कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी की है। उन्होंने परिवार,समाज से खतरा बताते सुरक्षा की मांग की। कोर्ट में चंद्रकांता ने 22 फरवरी 2025 को इस्लाम कबूल करने का दावा किया। इसके लिए खानकाहे आलिया आरिफिया से प्रमाणपत्र जारी होने की बात कही। इसके बाद 26 मई 2025 को दोनों ने मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की और काजी से विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

सरकार की आपत्ति
राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी वकील ने जोड़े के दावे का विरोध करते हुए बताया कि जिस संस्था से धर्म परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी होने का दावा था,उसके सचिव ने ऐसा कोई दस्तावेज जारी करने से इंकार किया है। मतलब प्रमाणपत्र फर्जी था।

कोर्ट का आदेश
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुन कहा कि धर्मांतरण का आधार ही फर्जी है, तो इस धर्मांतरण बाद की शादी भी वैध नहीं है। मुस्लिम कानून में विवाह केवल इस्लाम के अनुयायियों में मान्य है। धर्म परिवर्तन ही अवैध है तो शादी भी अवैध होगी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कासिम और चंद्रकांता चाहें तो विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) में शादी कर सकते हैं। इसमें शादी के लिए धर्म परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होगी।

चंद्रकांता भेजी शेल्टर होम
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक याचिकाकर्ता विशेष विवाह अधिनियम में कानूनी रूप से शादी रजिस्टर नहीं कर लेते, तब तक चंद्रकांता को प्रयागराज के महिला शेल्टर होम में रखा जाए। यह व्यवस्था इसलिए क्योंकि चंद्रकांता ने स्पष्ट कहा था कि वह अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील पर भी 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि आदेश की तारीख से 15 दिनों में प्रयागराज के मध्यस्थता और सुलह केंद्र में जमा करनी होगी। अब यह केस खूब चर्चा में है।

Allahabad High Court Said Prohibition Of Religious Conversion Law Applies On Live In Relationships Too
लिव इन पर भी लागू होता है धर्मांतरण क़ानून, जानिए क्या हो सकता है एक्शन?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम न केवल अंतरधार्मिक विवाहों पर लागू होता है, बल्कि लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू होता है। मतलब कि अलग-अलग धर्मों के जोड़े कानूनी प्रक्रिया से बिना धर्म परिवर्तन किए साथ नहीं रह सकते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यूपी धर्मांतरण निषेध कानून न केवल परस्पर विरोधी धर्म के लोगों की शादी बल्कि लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू होता है। इसलिए बिना कानूनी प्रक्रिया  धर्म परिवर्तन किए विपरीत धर्म का जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल ने अंतर-धार्मिक जोड़े की उस याचिका को खारिज करते दिया जिसमे पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन न केवल विवाह के उद्देश्य को आवश्यक है, बल्कि यह वैवाहिक प्रकृति के सभी रिश्तों में भी जरूरी है। मौजूदा मामले में किसी भी याचिकाकर्ता ने अधिनियम की धारा 8 और 9 के अनुसार धर्म परिवर्तन को आवेदन नहीं दिया है और आर्य समाज मंदिर में शादी का पंजीकरण कराकर लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 3(1) के अनुसार कोई भी व्यक्ति गलत बयानी, बल का प्रयोग या गुमराह करके किसी अन्य व्यक्ति को सीधे या अन्यथा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित या परिवर्तित करने की कोशिश नहीं करेगा।

अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या किसी कपटपूर्ण तरीके से कोई भी व्यक्ति इस तरह के रूपांतरण को उकसाएगा, मनाएगा या साजिश नहीं करेगा। कानून में स्पष्ट है कि न केवल अंतर धार्मिक विवाह के मामलों में बल्कि विवाह की प्रकृति के रिश्तों में भी धर्म परिवर्तन आवश्यक है। हिंदू लड़के ने मुस्लिम लड़की से आर्य समाज मंदिर में शादी का पंजीकरण कराया और लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।अपने संबंधों में हस्तक्षेप पर रोक लगाने व पुलिस सुरक्षा की मांग में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी है।

Agreement In Religious Conversion And Rape Case Is Invalid Conversion To Islam Is Valid Only By Faith In Allah Said Allahabad High Court
धर्म परिवर्तन और दुष्कर्म में समझौता अमान्य, ‘अल्लाह’ और पैगंबर में आस्था से ही इस्लाम धर्म परिवर्तन मान्य- इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिंदू युवती के धर्म परिवर्तन और दुष्कर्म मामले में दायर याचिका निरस्त कर दी है। न्यायालय ने कहा कि धर्म परिवर्तन तभी वास्तविक माना जा सकता है, जब व्यक्ति की आस्था अपने नए धर्म में हो। अदालत ने दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध के संबंध में कोई समझौता स्वीकार नहीं किया।

उत्तर प्रदेश कानून का उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन रोकना
कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म एक गंभीर अपराध
समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती-कोर्ट
Allahabad High Court
इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक हिंदू युवती के जबरन धर्म परिवर्तन और दुष्कर्म मामला निरस्त करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन तभी असली माना जाएगा, जब व्यक्ति को ‘ईश्वर (अल्लाह) एक है’ में विश्वास हो। साथ ही मोहम्मद को पैगंबर  स्वीकार करे। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश धर्मांतरण विरोधी कानून का उद्देश्य धोखे या जबरन धर्म परिवर्तन रोकना है।

कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन तभी सही माना जाएगा जब व्यक्ति का दिल बदले और उसकी आस्था नए धर्म में ज्यादा हो। 27 मार्च के फैसले में अदालत ने यह बात कही। अदालत ने यह भी कहा कि दुष्कर्म गंभीर अपराध है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति चौहान ने कहा कि मामले में धारा 376 (दुष्कर्म) और गैर कानूनी धर्म परिवर्तन के आरोप गंभीर हैं, इसलिए दोनों पक्षों में समझौते के आधार पर कार्यवाही निरस्त नहीं की जा सकती।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 7 जून, 2021 को एक FIR हुई थी। इसमें कहा गया था कि राहुल उर्फ मोहम्मद अयान ने फेसबुक पर अपनी पहचान छिपा पीड़िता को शादी को इस्लाम अपनाने को मजबूर किया। इस बीच उसने उसका यौन शोषण भी किया। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का इस्लाम धर्म अपनाना तभी सही माना जाएगा, जब वह बालिग और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। साथ ही मर्जी से इस्लाम स्वीकार करे। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि धर्म परिवर्तन दिल से होना चाहिए। सिर्फ दिखावे को नहीं।

कोर्ट ने दुष्कर्म को गंभीर अपराध बताया। अदालत ने कहा कि यह महिला को अंदर तक हिला देता है और उसकी इज्जत तार-तार कर देता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध में कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश धर्मांतरण विरोधी कानून पर कोर्ट ने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को धोखे, दबाव या लालच से धर्म परिवर्तन करने से बचाना है। कानून यह सुनिश्चित करता है कि हर व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म चुनने को स्वतंत्र हो।

इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि राहुल उर्फ मोहम्मद अयान ने उसे अपनी असली पहचान छिपाकर फंसाया। उसने उस पर इस्लाम अपनाने को दबाव डाला और उसका यौन शोषण किया। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से ले मामला निरस्त करने से इनकार कर दिया। कोर्ट का यह फैसला धर्म परिवर्तन और महिलाओं के अधिकारों के बारे में महत्वपूर्ण बातें कहता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन दिल से होना चाहिए और इसमें किसी तरह का दबाव या धोखा नहीं होना चाहिए। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि दुष्कर्म गंभीर अपराध है जिसके लिए दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया पर लोगों से दोस्ती करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। अपनी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। अगर कोई आप पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव डालता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

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