राज्यपाल

Governors Not Get Pension : राज्यपालों को पेंशन नहीं मिलती. ये तथ्य हैरान करने वाला है. सामान्य तर्क कहता है कि रिटायर होने के बाद सांसदों, विधायकों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल भी पेंशन और सुविधाओं के हकदार होते होंगे. आखिर क्या वजह है जो ऐसा नहीं होता.

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क्या आपको मालूम है कि भारत के राज्यों में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाने वाले राज्यपालों को 05 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन मिलती है कि नहीं. इस सवाल का जवाब ही ऐसा है कि आप हैरान रह जाएंगे. राज्यपालों को रिटायरमेंट के बाद क्या सुविधाएं मिलती हैं, इस सवाल का जवाब भी आसान नहीं है.

Explainer राज्यपाल को रिटायरमेंट के बाद क्यों नहीं मिलती पेंशन और सुविधाएं
राज्यपालों को पेंशन के बारे में क्या कहता है केंद्र और राज्य सरकारों का प्रावधान news18 Graphics
जब राज्यपाल पद पर होते हैं तो उन्हें बहुत अच्छा मानदेय मिलता है. उनका वेतन 3.5 लाख रुपए महीना होता है. उन्हें बहुत लंबा चौड़ा सरकारी आवास मिलता है. नौकर चाकरों और स्टाफ की पलटन होती है. तब राष्ट्रपति के बाद अगर किसी को इतनी सुविधाएं और वेतन मिलता है तो वो राज्यपाल ही होते हैं.

तब उन्हें यात्रा भत्ते से लेकर टेलीफोन भत्ता और अपने आवास को सुसज्जित कराने के लिए खासा भत्ता मिलता है लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद क्या उन्हें ये सुविधाएं जारी रहती हैं.

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राज्यपाल को सैलरी के अलावा इलाज की सुविधा, निवास की सुविधा, यात्रा की सुविधा, फोन कॉल का बिल और बिजली का बिल जैसी कई विशेष सुविधाएं पद पर रहते हुए मिलती है. राज्यपाल राज्य में केंद्र का प्रतिनिधि होता है. वह मुख्यमंत्री द्वारा किए गए कामों की निगरानी करता है. केंद्र को राज्य में होने वाली गतिविधियों से अवगत कराता है.

1982 के राज्यपाल (अनुमोदन भत्ते और विशेषाधिकार) अधिनियम के अनुसार 5 साल की कार्यकाल अवधि के दौरान उनकी सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की जा सकती.

रिटायर होने के बाद क्या मिलता है
लेकिन एक बार जब कोई राज्यपाल रिटायर हो जाता है तो सरकार उन्हें ना तो कोई आवास उपलब्ध कराती है और ना ही रिटायरमेंट के बाद कोई पेंशन या भत्ता ही देती है. उन्हें केवल एक ही भत्ता मिलता है, जो चिकित्सा से जुड़ा है. तब तबीयत खराब होने की सूरत में सरकार उनका पूरा खर्च उठाती है लेकिन इसके अलावा सारे खर्च उन्हें खुद ही करने होते हैं. 1982 के अधिनियम के तरह राज्यपाल को पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है.

उसके बाद कुछ नहीं मिलता
दिल्ली में रिटायर होकर रह रहे एक पूर्व राज्यपाल के करीबी सूत्र ने बताया कि सरकार से राज्यपाल को एक पैसा नहीं मिलता, उन्हें सारी व्यवस्था खुद ही करनी होती है. हालांकि ये हैरानी का विषय भी है कि जिस देश में राष्ट्रपति से लेकर एक अदना विधायक तक को रिटायर होने के बाद पेंशन और सुविधाएं मिलती हैं तो राज्यपाल को क्यों इससे महरूम रखा जाता है.

राज्यपालों को पेंशन का क्या प्रावधान है
जब तक कई राज्यपाल अपने पद पर होता है, तब तक उस राज्य की संचित निधि से उसको वेतन और भत्ते दिए जाते हैं. इसके बाद राज्य उसे अपनी निधि से कुछ भी देना बंद कर देता है.

क्या हैं राज्यपाल बनने के लिए योग्यताएं
भारत में किसी राज्य का राज्यपाल बनने को कुछ योग्यताओं का होना आवश्यक होता है.इसको भारत का नागरिक होना तथा न्यूनतम 35 वर्ष की आयु होना अनिवार्य है.इसके साथ ही राज्यपाल उसे ही नियुक्त किया जा सकता है,जो किसी लाभ के पद पर नहीं होता है.इसके अलावा हम ये भी कह सकते हैं कि जो राज्यविधान सभा सदस्य बनने की योग्यता पूरी करता हो.उसे ही राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है.

क्या कहता है राज्यपालों से संबंधित बिल
द गर्वनर्स एमेंडमेंट बिल 2012 को 10 दिसंबर 2012 को लोकसभा में तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पेश किया. इसमें राज्यपाल रहते हुए उसकी परिलब्धियों को प्रति माह 1,10,000 देने का प्रावधान किया गया जबकि पूर्व राज्यपाल को केवल चिकित्सा सुविधा का ही हकदार माना गया. बिल में राज्यपाल को आजीवन एक कार्यालय सहायक देने का प्रावधान हुआ,जिसका वेतन 25,000 रुपए महीना होगा.

क्यों केंद्र के पेंशन संबंधी प्रस्ताव को लगा झटका
इससे पहले वर्ष 2008 में भी केंद्र सरकार ने राज्यपालों को पेंशन दिए जाने के मामले में कोशिश की थी लेकिन ये आगे नहीं बढ़ पाया.फिर इसे खत्म कर दिया गया.इसमें मामला यहां आकर अटक गया कि पूर्व राज्यपालों को अगर पेंशन दी जाए तो किस निधि से दी जाए.

केंद्र चाहता था कि राज्य ये जिम्मा उठाएं लेकिन राज्यों ने केंद्र का प्रस्ताव सिरे से निरस्त कर दिया.उनका तर्क था कि चूंकि केंद्र ही राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति करता है और वो राज्य में केंद्र के प्रतिनिधि के रुप में तैनात किए जाते हैं,इसलिए पेंशन की राशि केंद्र से दी जानी चाहिए. इसके बाद ये बात यहीं रुक गई.

आमतौर पर हमारे देश में जो राज्यपाल नियुक्त होते हैं, वो आला दर्जे के ब्यूरोक्रेट,उच्च सैन्य अफसर या केंद्रीय मंत्रियों या पूर्व सांसदों को बनाया जाता है.इसलिये वो राज्यपाल पद से हटने के बाद अपने पूर्व पद को दी जाने वाली पेंशन जरूर हासिल करते हैं. अगर कोई राज्यपाल अगर कभी किसी पद पर नहीं रहा हो या इसमे से कुछ नहीं हो तो फिर वह किसी भी तरह की कोई पेंशन हासिल नहीं करता.

पूर्व राष्ट्रपति को क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं?
– राष्ट्रपति के सेवानिवृत्त होने के बाद 1.5 लाख रुपये की की पेंशन मिलती है.राष्ट्रपति के जीवनसाथी को भी हर माह 30,000 रुपये की सचिवीय सहायता मिलती है.
– राष्ट्रपति को मुफ्त आवास और चिकित्सा देखभाल और कार्यालय व्यय के लिए सालाना 1 लाख रुपये मिलते हैं.
– सचिवीय कर्मचारियों और दफ्तर को 60,000 रुपये दिए जाते हैं
– पूर्व राष्ट्रपति को कम से कम 8 कमरों वाला बंगला दिया जाता है
– पूर्व राष्ट्रपति को 2 लैंडलाइन,एक मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्शन
– पूर्व राष्ट्रपति को मुफ्त बिजली और पानी की सुविधा
– पूर्व राष्ट्रपति को गाड़ी और ड्राइवर भी दिए जाते हैं
– पांच लोगों का निजी स्टाफ भी पूर्व राष्ट्रपति को मिलता है
– दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की सुरक्षा दी जाती है
– पूर्व राष्ट्रपति (Former President) को एक व्यक्ति के साथ प्रथम श्रेणी में मुफ्त ट्रेन और हवाई यात्रा की सुविधा

क्या सुविधाएं रिटायर पूर्व प्रधानमंत्री को मिलती हैं
पूर्व प्रधानमंत्रियों को केबिनेट मंत्री के बराबर की सुविधाएं मिलती हैं, जो ये हैं
– 20,000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन
– नई दिल्ली के लुटियंस जोन में आजीवन मुफ्त आवास
– आजीवन नि:शुल्क चिकित्सा सहायता
– 14 लोगों का सचिव स्टाफ (पहले पांच साल तक)
छह घरेलू स्तर के हवाई टिकट (एग्जीक्यूटिव क्लास) एक साल में
– पूरी तरह फ्री रेल यात्रा
– पांच साल तक ऑफिस का पूरा वास्तविक पूरा खर्च
– एक साल तक ही एसपीजी सुरक्षा, उसके बाद सुरक्षा में भी कटौती की जाती है
– ज़िंदगीभर के लिए मुफ्त बिजली और पानी
– पांच साल के बाद: एक निजी सहायक और एक चपरासी, कार्यालय खर्च के लिए सालाना 6,000 रुपये.

पूर्व सांसदों को पेंशन और सुविधाएं
संसद सदस्यों को वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत पेंशन मिलती है. पूर्व सांसद को हर महीना 20 हजार रुपए पेंशन मिलती है. 5 साल से ज्यादा हर साल के लिए 1,500 रुपए अलग से दिए जाते हैं. योगी आदित्यनाथ कमेटी 35 हजार रुपए पेंशन की सिफारिश कर चुकी है. पेंशन के लिए कोई न्यूनतम समय सीमा तय नहीं है. यानी कितने भी समय के लिए सांसद रहा व्यक्ति पेंशन का हकदार होगा।

विधायकों को पेंशन और सुविधाएं
हर राज्य में विधायकों को पेंशन और सुविधाएं अलग अलग हैं
– पंजाब में पूर्व विधायकों को उनके पहले कार्यकाल के लिए पेंशन के रूप में 15 हजार रुपए और फिर अगले हर कार्यकाल के लिए 10 हजार रुपए देने का प्रावधान. इस रकम में पहले 50 फीसदी डीए भी जुड़ेगा.
– मध्य प्रदेश विधानसभा के सेक्शन 6 A के तहत, मध्य प्रदेश में पूर्व विधायकों को हर महीने 20 हजार रुपए की पेंशन मिलती है. 05 साल से ज्यादा विधायक रहने वालों की पेंशन में हर साल 800 रुपए हर महीने के हिसाब से पेंशन जुड़ती जाती है.
– राजस्थान में यदि किसी विधायक ने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया तो हर महीने 35 हजार रुपए पेंशन के रूप में मिलते हैं. हर अगले 05 साल के कार्यकाल पर हर महीने के हिसाब से 1,600 रुपए और मिलेंगे. यानी दो कार्यकाल पूरा करने के बाद उसे हर महीने 43 हजार रुपए मिलने लगेंगे.
– उत्तर प्रदेश में पूर्व विधायकों को हर महीने 25 हजार रुपए पेंशन मिलती है. 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले विधायकों की पेंशन में हर साल 2 हजार रुपए की बढ़ोतरी होती जाती है
– गुजरात में विधायकों को पेंशन नहीं जाती लेकिन कुछ सुविधाएं जरूर मिलती हैं
– इसके अलावा सभी राज्यों के विधायकों को यात्रा समेत कई तरह के भत्ते और सुविधाएं अलग मिलती हैं

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