तीर्थ पुरोहितों के परंपरागत पूजा अधिकार नही छीन सकता BKTC: नैनीताल हाईकोर्ट
केदारनाथ धाम में तीर्थ पुरोहितों के हकों पर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, BKTC को लगा झटका, जानिए पूरा मामला
2023 से चल रहे इस मामले में पंच पंडा समिति रुद्रपुर के अध्यक्ष अमित शुक्ला वादी थे. प्रतिवादी पक्ष में BKTC के मुख्य कार्याधिकारी थे.
केदारनाथ धाम
रुद्रप्रयाग 25 मई 2026 : केदारनाथ धाम से जुड़े हक-हकूकों के बहुचर्चित मामले में पंच पंडा समिति रुद्रपुर को बड़ी न्यायिक जीत मिली है.सिविल जज जूनियर डिवीजन ऊखीमठ ने अपने ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अब रुद्रपुर के तीर्थ पुरोहितों को केदारनाथ धाम एवं उससे जुड़े सहयोगी मंदिरों के गर्भगृह में अपने यजमानों के अभिषेक, संकल्प,परिक्रमा और रुद्री पाठ कराने से नहीं रोक सकेगी.
साथ ही मंदिर परिसर में यजमानों से भेंट,दक्षिणा और उपहार ग्रहण करने के पारंपरिक अधिकारों पर भी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकेगा.इस फैसले को केदारनाथ धाम की परंपराओं और तीर्थ पुरोहितों के प्रथागत अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है.
वास्तव में,वर्ष 2023 से चल रहे इस मामले में पंच पंडा समिति रुद्रपुर के अध्यक्ष अमित शुक्ला वादी थे,जबकि प्रतिवादी पक्ष में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी शामिल थे.मामले की सुनवाई में न्यायालय में लंबी और गहन बहस हुई.पंच पंडा समिति के अधिवक्ताओं ने ऐतिहासिक अभिलेख,ब्रिटिश कालीन अभिलेख और स्वतंत्र भारत में विभिन्न न्यायालयों के आदेश अदालत के समक्ष प्रस्तुत किये.
इन अभिलेखों के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि तीर्थ पुरोहितों के ये अधिकार सदियों पुराने और परंपरागत हैं,जिन्हें मंदिर समिति सीमित कर रही थी.पंच पंडा समिति के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील भट्ट, अधिवक्ता आनंद बजवाल और अधिवक्ता हार्दिक रावत ने प्रभावी पैरवी की.न्यायालय के आदेश से रुद्रपुर के तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है.
ऊखीमठ के ब्लॉक प्रमुख पंकज शुक्ला ने फैसले को ‘सत्य और परंपरा की जीत’ बताते हुए कहा कि न्यायालय ने भी माना है कि मंदिर समिति तीर्थ पुरोहितों के प्रथागत अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही थी.अब अदालत ने वे अधिकार पुष्ट कर धार्मिक परंपराओं को सम्मान दिया है.
फैसले के बाद प्रदीप शुक्ला, अमित कपरवाण, दीप नारायण शुक्ला, गणेश शुक्ला और नवीन शुक्ला समेत रुद्रपुर के अनेक लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि ‘बाबा केदारनाथ के दरबार में आखिरकार सत्य और न्याय की जीत हुई है’.
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद केदारनाथ धाम और उससे जुड़े सहयोगी मंदिरों की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य में तीर्थ पुरोहितों के पारंपरिक अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण सिद्ध होगा.
सवालों में BKTC: क्या श्रद्धालुओं के दान से हो रही VIP कआ आतिथ्य ? जांच की मांग
बाबा केदार के चढ़ावे से नेताओं पर हजारों रुपए खर्च करने का आरोप BKTC पर लगा है. यह खुलासा आरटीआई से हुआ है.
BKTC EXPENDITURE ON VIP
बदरी-केदार मंदिर
रुद्रप्रयाग:आस्था, श्रद्धा और सनातन विश्वास के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल बाबा केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) पर गंभीर आरोप लगे हैं कि श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्र में चढ़ाई गई राशि का इस्तेमाल नेताओं, उनके परिजनों और खास लोगों की आवभगत में किया गया.
सूचना के अधिकार (RTI) से सामने आए कथित खर्चों ने प्रदेश की राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक हड़कंप मचा दिया है. दरअसल, सबसे ज्यादा चर्चा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी और बीेजेपी महिला नेता नेहा जोशी के केदारनाथ प्रवास को लेकर हो रही है. आरोप है कि उनकी यात्रा और विशेष व्यवस्थाओं पर मात्र दो दिनों में करीब 60 हजार रुपये खर्च किए गए. हालांकि, इस मामले पर नेहा जोशी का बयान भी सामने आया है.
केदारनाथ धाम में क्या श्रद्धालुओं के दान से हो रही VIP का आतिथ्य?
नेहा का कहना है कि, उनको मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली है कि बीकेटीसी द्वारा एक आरटीआई के जवाब में उनके व उनके साथियों द्वारा पिछले वर्ष बाबा केदारनाथ की दो दिवसीय यात्रा के दौरान गायत्री भवन में किए प्रवास के भुगतान को बीकेटीसी द्वारा किया गया बताया गया है, जो एकदम झूठ है.
बाबा केदार मेरे आराध्य हैं और उनके आशीर्वाद से मैं नियमित रूप से यह यात्रा करती हूं. पिछले वर्ष मैं व मेरे अन्य साथी बाबा केदारनाथ जी के कपाट खुलने के पावन अवसर पर बाबा के धाम गए थे और गायत्री भवन में रुके थे. वहां लिए गए तीनों कमरों का पूरा भुगतान हमने, डिजिटल पेमेंट का विकल्प उपलब्ध न होने के कारण, नकद में किया था, जिसके साक्ष्य उपलब्ध हैं और जिसकी पुष्टि गायत्री भवन के कर्मचारी भी कर देंगे. इसके अलावा GMVN में भी 2 कमरे लिए गए जिसका भी पूरा भुगतान किया गया.
– नेहा जोशी, बीजेपी नेता –
इस बात की गहन पड़ताल होनी चाहिए कि किस प्रकार पहले से ही भुगतान किए गए कमरों का भुगतान दोबारा मेरे नाम की रसीद काटकर लिया गया. क्या यह किसी साजिश के अंतर्गत दुर्भावना के साथ किया गया कृत है या योजनाबद्ध रूप से की जा रही अनियमितता. कुछ भी हो लेकिन आज मैं इसकी शिकार हुई हूं, पर कल आप में से कोई भी हो सकता है. मैं मीडिया के सभी साथियों से भी विनम्र आग्रह करती हूं कि इस विषय की निष्पक्षता से पड़ताल करें और सभी संबंधित व्यक्तियों से सही सवाल कर सत्य जनता के सामने रखें. मुझे विश्वास है कि सत्य जल्द ही सबके सामने आएगा और बाबा केदारनाथ जी का आशीर्वाद सदैव सत्य के साथ रहेगा.
– नेहा जोशी, बीजेपी नेता –
केवल नेहा जोशी ही नहीं, बल्कि केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर लगभग 37 हजार 500 रुपये खर्च दर्शाए जाने का दावा किया गया है. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मंदिर समिति के खर्चों में यह भारी अंतर किस आधार पर तय किया गया? इस मामले में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल का भी पक्ष सामने आया है. ईटीवी भारत से बात करते हुए केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि
फिर सवालों के घेरे में BKTC
देखिए किस वीआईपी पर कितना खर्च हुआ. (@अधिवक्ता विकेश नेगी)
वो केदारनाथ में क्षेत्रीय विधायक है और उन्होंने कभी भी प्रोटोकॉल की मांग नहीं की है. उल्टा उन्हें हर कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है और बतौर विधायक उनको जाना भी पड़ता है. क्षेत्र में उनके समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और विशेषतौर पर केदारनाथ में पांडा पुरोहित भी उनसे जुड़े हुए रहते है तो हर बार उनके रहने की व्यवस्था ऐसे ही उनके समर्थकों द्वारा की जाती है और कभी अपना निजी दौरा होता है तो उसका वो ख़ुद खर्चा उठाती है. कैसे उनके नाम से प्रोटोकॉल मांगा जा रहा है, उनकी समझ से परे है. उन्होंने कहा कि वो बीसियों सालों से लोगों के बीच में जा रही है, उन्हें प्रोटोकॉल की जरूरत नहीं है, वो रात दिन उन्ही लोगों के बीच में हैं.
-आशा नौटियाल, केदारनाथ विधायक-
पंकज मोदी पर भी 22 हजार रुपये खर्च: मामला यहीं नहीं रुका. आरोपों के अनुसार BKTC के मुख्य कार्याधिकारी हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक (PA) के केदारनाथ प्रवास का करीब 23 हजार रुपये का बिल भी मंदिर समिति ने वहन किया. इतना ही नहीं, पंकज मोदी के प्रवास पर भी लगभग 22 हजार रुपये खर्च किए जाने की चर्चा ने विवाद को और हवा दे दी है.
फिर सवालों के घेरे में BKTC
आरटीआई में मिला खर्चों का ब्यौरा. (@अधिवक्ता विकेश नेगी)
बड़ा सवाल: इन खुलासों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बाबा केदारनाथ के भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाया गया दान VIP संस्कृति को पोषित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है? जहां एक ओर हजारों श्रद्धालु यात्रा मार्ग में मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित व्यवस्थाओं की उम्मीद करते हैं. वहीं दूसरी ओर विशेष लोगों की आवभगत पर कथित तौर पर हजारों रुपये खर्च किए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
@अधिवक्ता विकेश नेगी
RTI एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी ने आरटीआई लगाई थी. (@अधिवक्ता विकेश नेगी)
इस पूरे मामले को RTI के जरिए उजागर करने वाले RTI एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी ने BKTC की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि मंदिर समिति को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दानपात्र की राशि किन नियमों और मानकों के तहत खर्च की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि समिति में जवाबदेही और पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है.
सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से तूल पकड़ चुका है. लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या आम श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन का उपयोग VIP मेहमाननवाजी के लिए किया जाना उचित है? कई लोगों ने इसे दान की राशि का दुरुपयोग बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है.
BKTC ने रखा अपना पक्ष: विवाद बढ़ने पर BKTC ने भी अपना पक्ष रखा है. BKTC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ का बयान आया है. उन्होंने कहा कि
ये विषय मंदिर समिति के संज्ञान में भी है और मंदिर समिति इस मामले पर बेहद गंभीर है. मंदिर समिति इस विषय से संबंधित सभी पत्रावली और अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है और जैसे ही स्पष्ट तौर पर कुछ सामने आता है उसके बाद नियम अनुसार वैधानिक कार्यवाही की जाएगी.
-सोहन सिंह रांगड़, CEO, BKTC-
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गणेश जोशी नेहा जोशी
बीकेटीसी पर फिर से सवाल
SERIOUS ALLEGATIONS BKTC
PILGRIM PRIESTS KEDARNATH
KEDARNATH DHAM
तीर्थ पुरोहितों के हकों पर फैसला
BADRI KEDAR TEMPLE COMMITTEE

