जनगणना 2027 ,1 चरण 1 अप्रैल से: 33 सवाल पूछेगी सरकार,मकान-वाहन से लेकर शौचालय तक,झूठ बोलने पर सजा
भारत की जनगणना 2027 पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी। सरकार ने डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित किया है। दो चरणों में प्रस्तावित इस जनगणना को 11,718 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत हुआ है। पहले चरण में गृह सूची और दूसरे चरण में जनसंख्या गणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल से जानकारी दी जा सकेगी।
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- 2027 में पूरे देश में होगी जनगणना।
- जनगणना को 12 हजार करोड़ का बजट।
- जनगणना से विकास योजनाओं को मिलेगी दिशा।
नई दिल्ली 30 मार्च 2026। भारत की जनगणना 2027 देश के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी। सरकार के अनुसार यह नई व्यवस्था डेटा सुरक्षा, तेजी और पारदर्शिता ध्यान में रखकर तैयार हुई है। द्विचरणीय जनगणना देश के हर व्यक्ति और हर घर की जानकारी डिजिटली संग्रहित करेगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जनगणना 2027 को 11,718 करोड़ रुपये का बजट है। जनगणना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी। पहला चरण गृह सूची और गृह गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगी। दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा
सरकार के अनुसार जनगणना मोबाइल ऐप से होगी और लोग चाहें तो वेब पोर्टल पर खुद भी जानकारी भर सकेंगें। पूरा काम रियल-टाइम में Census Management and Monitoring System (CMMS) से मॉनिटर होगा।
कैसे बदलगी जनगणना की प्रक्रिया
डिजिटल जनगणना में हर बिल्डिंग का जियो-टैगिग होगा। ऐप में अंग्रेजी, हिंदी सहित 16 से ज्यादा भाषाओं का विकल्प होगा। इस बार प्रवास से जुड़े विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे ,जैसे जन्मस्थान, पिछला निवास, कितने समय से वर्तमान स्थान पर रह रहे हैं और स्थान बदलने की वजह क्या है। सबसे महत्वपूर्ण बात1931 के बाद पहली बार सभी समुदायों की जाति से जुड़े आंकड़े भी जुटाए जाएंगे, सिर्फ SC/ST तक सीमित नहीं रहेंगें।
डिजिटल जनगणना के लाभ
डिजिटल होने से आंकड़ों की गिनती और रिपोर्ट तैयार करना काफी तेज हो जाएगा। अब डेटा रियल-टाइम अपलोड होगा और अनुमान है कि शुरुआती आंकड़े 10 दिन में और अंतिम रिपोर्ट 6–9 महीनों में मिल जाएगी। पहले पेपर फॉर्म के कारण यह प्रक्रिया कई साल ले लेती थी।
तेज और सटीक आंकड़ों से 2029 की नई लोकसभा सीटों के निर्धारण, फंड वितरण और सरकारी योजनाओं की योजना बनाने में मदद मिलेगी। सिस्टम में ऑटो-चेक, जियो-टैगिंग और लोगों के खुद जानकारी भरने का विकल्प होने से गलतियों और छूटे हुए घरों की संख्या घटेगी।
लागत, रोजगार और उपयोगिता
- सरकार को टैबलेट खरीदने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि गणना कर्मचारी अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करेंगे।
- इससे खर्च कम होगा और लगभग 2.4 करोड़ व्यक्ति-दिवसका अस्थायी रोजगार भी मिलेगा।
- जहां नेटवर्क कमजोर है, वहां बैकअप के तौर पर पेपर फॉर्म भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
क्या होंगी चुनौतियां?
भारत जैसा बड़ा और डिजिटल रूप से असमान देश होने के कारण चुनौतियां भी हैं। देश में अभी लगभग 65% आबादी ही ऑनलाइन है। पहाड़ी, जंगल और दूर-दराज के कई इलाकों में नेटवर्क बहुत कमजोर है। ऐसे स्थानों पर सही डेटा जुटाने में खतरा है कि गरीब और पिछड़े लोगों की गिनती छूट सकती है।
डिजिटल साक्षरता भी समस्या है। जनगणना कर्ता 30 लाख कर्मचारियों (ज्यादातर शिक्षक) को ऐप चलाने की अच्छी ट्रेनिंग देनी होगी। कई वृद्ध, ग्रामीण महिलाएं या प्रवासी मजदूर मोबाइल ऐप देखकर हिचक सकते हैं।
डेटा सुरक्षा पर चिंता
इस बार जाति, माइग्रेशन जैसी संवेदनशील जानकारी मोबाइल नेटवर्क से भेजी जाएगी। इसलिए साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी बहुत बड़ी चिंता है और सरकार को इसे पूरी तरह सुरक्षित रखना होगा।
Census 2027 India All You Need To Know About 33 Point Question For House Listing
House Listing Census India: केंद्र सरकार की ओर से घोषित जनगणना 2027 के पहल चरण में मकान की स्थिति और सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे।
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 33 सवालों वाली नई प्रश्नावली जारी की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इसमें इंटरनेट, LPG, पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ बदलते सामाजिक ढांचे को समझने पर खास जोर दिया गया है।
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जनगणना 2027 में 33 सवाल पूछेगी सरकार
प्रश्नावली 2011 की पिछली जनगणना के बाद भारतीय समाज में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें घर के प्रकार, स्थान और संरचना से जुड़े सवालों के साथ-साथ डिजिटल युग को देखते हुए इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता पर भी नया सवाल शामिल किया गया है। इसके अलावा एलपीजी, पीने के पानी और अन्य मौलिक सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी जानकारी ली जाएगी।
प्रश्नावली में स्वच्छता और बुनियादी ढांचे से जुड़े पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है।
इसमें शौचालय की उपलब्धता, गंदे पानी की निकासी व्यवस्था और नहाने की सुविधाओं से जुड़े सवाल शामिल हैं।
साथ ही घरों में खाए जाने वाले मुख्य अनाज के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी, जिससे खाद्य सुरक्षा और क्षेत्रीय खान-पान के पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी।
दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा
जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहला चरण हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन होगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना, जो 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी। यह भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी, जो देश में नीति निर्माण और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगी।
सवालों में किसी का गलत जवाब दिया तो सजा
जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है. इस दौरान 33 सवाल पूछे जाएंगे और अगर इस दौरान किसी सवाल का गलत जवाब दिया तो कार्रवाई हो सकती है.
पहला चरण पहली मार्च से
डिजिटल जनगणना का पहला चरण कल यानी 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहा है. इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना कहा जा रहा है और इस बार ये दो चरणों में होगी. पहली बार जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी और पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध होगा.
पहले चरण में मकानों की गणना होगी और उसमें 33 सवाल पूछे जाएंगे. ऐसे में इन सभी सवालों का सही जवाब देना जरूरी है और अगर कोई नहीं करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में जानते हैं कि अगर कोई गलत जानकारी देता है या फिर किसी सवाल का जवाब नहीं देता है तो क्या कार्रवाई की जा सकती है?
गलत जानकारी दी तो क्या होगा?
जनगणना अधिनियम, 1948 में अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या अपनी जानकारी के अनुसार सवालों का जवाब देने से मना करता है, तो यह विधिक अपराध माना जायेगा. इसके लिए 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही, धारा 8 के अनुसार हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह जनगणना अधिकारी को सही और सटीक जानकारी दे. ऐसे में आपसे जो सवाल पूछा जाए उसका सही जवाब देना जरूरी है.
अधिकारियों के लिए भी सजा का प्रावधान
कुछ मामलों में अधिकारियों के लिए भी सजा तय है, जिसमें 1,000 रुपये अर्थदण्ड से लेकर तीन साल कैद या दोनों है. सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी जनगणना अधिकारी, या कोई भी व्यक्ति जिसे जनगणना करने में सहायता करने का कानूनी दायित्व सौंपा गया है… वो अधिनियम में सौंपे गए कर्तव्यों का पालन करने से इनकार करता है…या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. साथ ही कोई जनगणना अधिकारी जानबूझकर आपत्तिजनक या अनुचित प्रश्न पूछता है तो उस पर मुकदमा हो सकता है.
कौन से 33 सवाल पूछे जाएंगे?
घर की बनावट: घर के फर्श, दीवार और छत में किस सामग्री (मटेरियल) का इस्तेमाल हुआ है?
परिवार का मुखिया: घर के मुखिया का नाम, लिंग और वह किस समुदाय (SC, ST या अन्य) से ताल्लुक रखते हैं?
सुविधाएं और वाहन: घर में पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं? आपके पास किस तरह के वाहन (साइकिल, स्कूटर, कार आदि) हैं?
खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से किस अनाज का सेवन किया जाता है?
शादीशुदा जोड़े: घर में कितने विवाहित जोड़े रहते हैं? (यहीं लिव-इन कपल्स वाला नियम लागू होगा).
घर की स्थिति: मकान नंबर, बिल्डिंग नंबर और घर का मालिकाना हक (अपना या किराए का) क्या है?
दो चरण में होगी जनगणना
पहला चरण– मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO), जो अप्रैल से सितंबर, 2026 के दौरान राज्यों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित की जाएगी. इसके साथ ही मकान सूचीकरण कार्य से पूर्व 15 दिनों की स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध होगी. इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी.
दूसरा चरण– जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी. कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल के कुछ क्षेत्रों में ये सितंबर 2026 में होगी. CCPA के अनुसार, इस चरण में जाति गणना भी होगी. पिछली जनगणना 2011 में हुई थी. जनगणना 2027 क्रमानुसार 16वीं और स्वतंत्रता बाद 8वीं जनगणना होगी.



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