कार्पोरेट जिहाद:TCS में 8 महिलाओं समेत 9 कर्मचारी जबरन बनाये मुस्लिम,7 बंदी
नासिक आईटी कंपनी में धर्मांतरण का काला खेल, आठ महिलाओं समेत नौ कर्मचारियों को जबरन बनाया मुस्लिम
नासिक स्थित एक आइटी कंपनी में चल रहे यौन शोषण और मतांतरण कोशिश मामले में कंपनी के छह टीम लीडर्स, एक एचआर अधिकारी गिरफ्तार किये गये हैं। मामला ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ भी कहा जा रहा है।
आईटी कंपनी में टीम लीडर्स ने दबाव डालकर आठ महिलाओं सहित नौ बनाये मुस्लिम,छत पर मुस्लिम कपड़े पहनने की प्रेक्टिस (फोटो- एक्स)
आइटी कंपनी में टीम लीडर्स ने दबाव डाल आठ महिलाओं सहित नौ बनाये मुस्लिम
गोमांस खाने और ऑफिस में नमाज पढ़ने को किया मजबूर, सात गिरफ्तार
महिला कर्मचारियों का पहनावा बदला देख स्वजन की शिकायत पर सक्रिय हुई पुलिस
मुंबई 11 अप्रैल 2026 । नासिक स्थित TCS कंपनी में चल रहे यौन शोषण और मतांतरण की कोशिश के मामले में कंपनी के छह टीम लीडर्स, एक एचआर अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले को ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ भी कहा जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है।
नासिक की आइटी कंपनी TCS में कार्यरत महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी के सीनियर कर्मचारी (टीम लीडर्स) पिछले चार साल से उन पर यौन शोषण एवं मतांतरण का दबाव डाल रहे थे।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वहां आठ महिलाओं और एक पुरुष कर्मचारी को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित और मजबूर किया गया। सभी ने आरोप लगाया है कि उन्हें गोमांस खाने और आफिस में नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। उनके अपने धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया।
यह मामला तब सामने आया, जब कुछ महिला कर्मचारियों के पहनावे में बदलाव देखा गया और उन्होंने रमजान के दौरान रोजा रखना शुरू कर दिया। तब स्वजन की शिकायत के बाद नासिक पुलिस ने इस मामले में सभी पीडि़ताओं की ओर से कुल नौ एफआइआर दर्ज कर अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार लोगों में छह टीम लीडर्स हैं, जिनके नाम हैं, आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाह रुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार एवं दानिश शेख।
कंपनी की एचआर प्रबंधक अश्विनी छनानी की भी गिरफ्तारी हुई है, क्योंकि कर्मचारियों के शिकायत करने पर उसने आरोपितों पर कार्रवाई करने के बजाय पीडि़त महिलाओं को मुंह बंद रखने को धमकाया।
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, राज्य सरकार के निर्देश पर मामले की जांच को पुलिस उपायुक्त संदीप मिटके के नेतृत्व में एसआइटी गठित की गयी है।एसआइटी में अनुभवी पुलिस अधिकारियों के साथ साइबर विशेषज्ञ भी शामिल किये गये हैं, ताकि डिजिटल सुबूतों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच हो सके।
एसआइटी जांच कर रही है कि क्या यह कुछ लोगों का व्यक्तिगत स्तर पर किया गया अपराध है या कंपनी में कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
भेष बदलकर 7 महिला पुलिसकर्मियों ने नासिक की कंपनी में यौन उत्पीड़न का किया भंडाफोड़
मामला नासिक की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) में पिछले चार वर्षों से महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न से संबंधित है। मामले में नौ FIR लिखी गई हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न से लेकर धार्मिक अपमान तक के आरोप शामिल हैं।
सात महिला पुलिस अधिकारियों ने भेष बदलकर नासिक की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में प्रवेश किया और यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपित को महिला कर्मचारियों से अनुचित व्यवहार करते देखा, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां हुईं।
जब ये महिलाएँ कंपनी में एक बैठक में गईं, तो आरोपित को महिलाओं से दुर्व्यवहार और अश्लील हरकतें करते रंगे हाथों पकड़ा । पुलिस अब आरोपित के खिलाफ मजबूत प्रमाण जुटाने को 40 से अधिक CCTV फुटेज जांच रही है।
मामला पिछले चार वर्षों में नासिक की एक MNC में महिला कर्मचारियों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। टीम लीडर और मानव संसाधन (HR) प्रतिनिधि सहित छह लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में नौ मामले दर्ज किए गए हैं। शिकायत दर्ज कराने वाली महिलाएँ आमतौर पर 18 से 25 वर्ष की आयु के बीच की बताई जा रही हैं।
क्या हैं आरोप?
इस मामले में नौ FIR दर्ज की गई हैं – जिनमें यौन उत्पीड़न, शादी का झांसा देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाना, धर्म परिवर्तन का प्रयास और धार्मिक अपमान (जिसमें कर्मचारियों को नमाज़ पढ़ने और मांसाहारी भोजन खाने के लिए मजबूर करना शामिल है) जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने एक बयान में कहा, “जब शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं के बारे में कंपनी के मुख्य अधिकारी के पास बार-बार मौखिक शिकायत दर्ज कराई, तो उन्होंने छेड़छाड़ की शिकायतों पर संज्ञान लेने में विफल रहे; इसके बजाय, उन्होंने प्रभावी रूप से उनके कार्यों को बढ़ावा दिया।”
केस 1 (जुलाई 2022 – फरवरी 2026):
आरोपी – दानिश शेख, तौसीफ अत्तार और निदा खान – पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करके एक महिला कर्मचारी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। आरोपी तौसीफ अत्तार ने शादी के झूठे बहाने पीड़ित के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जबकि दानिश शेख ने ऑफिस लॉबी में उसके साथ अश्लील हरकतें करके उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश की।
केस 2 (मई 2023 – 19 मार्च, 2026):
आरोपी – रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी – पर एक महिला कर्मचारी को घूरने, उसे गलत तरीके से छूने और उसके निजी वैवाहिक जीवन के बारे में शर्मनाक टिप्पणी करने का आरोप है। औपचारिक शिकायत के बावजूद, कंपनी के मुख्य अधिकारी ने कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर आरोपियों को प्रोत्साहित किया।
केस 3 (2022 – फरवरी 2026):
आरोपी शफी शेख पर पीड़ित को अश्लील तरीके से घूरने और बैठकों के दौरान उसका उपहास करने का आरोप है। वहीं, तौसीफ ने पीड़ित के वैवाहिक जीवन में बच्चों की अनुपस्थिति के बारे में बेहद शर्मनाक टिप्पणी की और शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास कर उसे अपमानित किया।
केस 4 (4 मई, 2025 – दिसंबर 2025):
आरोपी तौसीफ अत्तार ने पीड़ित के निजी जीवन के बारे में अश्लील सवाल पूछे और अभद्र इशारे किए। इसके अलावा, उसने कार्यालय में अन्य हिंदू महिला कर्मचारियों की उपस्थिति में हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करके धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
पाँचवीं घटना (2022 – 23 मार्च, 2026):
आरोपी – तौसीफ अत्तार, दानिश, शाहरुख शेख और रज़ा मेमन – ने पीड़ित के धर्म का अपमान किया और उसे जबरन नमाज़ पढ़ने के लिए मजबूर किया। उसे जबरदस्ती मांसाहारी भोजन खिलाकर धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास किए गए और एक विशेष धर्म की महिलाओं के खिलाफ अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया।
छठी घटना (6 सितंबर, 2024 – फरवरी 2026):
आरोपी – आसिफ अंसारी और शफी शेख – ने महिला कर्मचारी के शरीर पर अश्लील टिप्पणी की और जानबूझकर उसे गलत तरीके से छुआ। इस घटना में भी आरोपी तौसीफ अत्तार ने पीड़ित के धर्म से जुड़े देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
सातवीं घटना (2025 – मार्च 2026):
आरोपी – आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रज़ा मेमन, तौसीफ अत्तार और शफी शेख – पर पीड़ित का पीछा करने, अश्लील टिप्पणी करने और दुर्भावनापूर्ण इरादे से छूने का आरोप है। उन्होंने मिलकर काम करते हुए उसके धर्म के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और माहौल खराब करने की कोशिश की।
आठवीं घटना (जनवरी 2025 – वर्तमान):
आरोपी – रज़ा मेमन और शफी शेख – ने पीड़ित की मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। आरोपी शफी ने जबरन उसे प्रपोज किया, जबकि रज़ा मेमन ने उसके शरीर के बारे में अश्लील टिप्पणी की और उसे गलत तरीके से छूने की कोशिश की।
नौवीं घटना (जनवरी 2026 – 1 अप्रैल, 2026):
आरोपी – रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी – ने पीड़ित के साथ अश्लील बातचीत की और अभद्र हरकतें कीं। पीड़ित के मना करने के बावजूद, उन्होंने उसके निजी जीवन में हस्तक्षेप करना जारी रखा, उस पर नज़र रखी और उसके शरीर पर अश्लील टिप्पणी करके उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
अब आगे क्या?
मंगलवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और अगले दिन स्थानीय अदालत में पेश किया गया। उन्हें 10 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। एक आरोपी न्यायिक हिरासत में है। गिरफ्तार किया गया सातवां व्यक्ति HR विभाग से जुड़ी एक महिला है, जिस पर यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) नियमों के अनुसार कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप है।
एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक के निर्देश पर मामलों की जांच के लिए एसीपी (क्राइम) संदीप मिटके के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। टीम इस तरह से संचालित होने वाले किसी बड़े रैकेट की संभावना की भी जांच कर रही है।
पुलिस ने अन्य महिलाओं से आग्रह किया है कि यदि उन्होंने भी उत्पीड़न का अनुभव किया है तो वे आगे आएं। उन्होंने महिलाओं से व्हाट्सएप नंबर 9923323311 पर संपर्क करने को कहा है।
भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने इसे कॉर्पोरेट जिहाद बताते हुए इसमें अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और मानव तस्करी का भी संदेह जताया है। गिरफ्तार हुए सभी सात लोगों को स्थानीय अदालत ने 10 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
‘ये कॉर्पोरेट जिहाद’, नासिक TCS में महिला कर्मचारियों से शोषण मामले में बोले मंत्री नितेश राणे
नासिक में TCS BPO से जुड़े 6 लोगों की गिरफ्तारी बाद मामला तूल पकड़ गया. महिला कर्मचारियों ने शोषण के आरोप लगाए,वहीं मंत्री नितेश राणे के बयान से राजनीति गरमा गई है.
Nasik tcs case women harassment allegations Nitesh Rane corporate jihad statement on Nashik News:
(महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे, फाइल फोटो)
महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. TCS के बीपीओ से जुड़े 6 लोगों की गिरफ्तारी के बाद जहां पुलिस जांच में जुटी है, वहीं राज्य सरकार के मंत्री नितेश राणे ने इसे गंभीर सामाजिक खतरे के रूप में पेश करते हुए कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या है पूरा मामला
नासिक पुलिस ने TCS के बीपीओ सर्विस से जुड़े 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने कंपनी में काम करने वाली जूनियर महिला कर्मचारियों के साथ यौन शोषण किया. कुछ महिला कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि उनके साथ लगातार उत्पीड़न होता रहा.
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और आरोपियों को हिरासत में लिया. फिलहाल जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आरोप कितने व्यापक हैं.
धार्मिक गतिविधियों के आरोप भी जुड़े
इस मामले में कुछ ऐसे दावे भी सामने आए हैं, जिन्होंने विवाद को और बढ़ा दिया है. आरोप है कि दफ्तर के अंदर धार्मिक गतिविधियां कराई जा रही थीं और कुछ कर्मचारियों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा था.
नितेश राणे का बड़ा बयान
मंत्री नितेश राणे ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” करार दिया है. उन्होंने कहा कि समाज को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.
राणे ने दावा किया कि करीब 15 पीड़ित लड़कियों ने शिकायत दी है और अन्य पीड़िताओं से भी आगे आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, तो लोग सामने आएं, सरकार उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी.
साथ ही उन्होंने कंपनी के एचआर विभाग पर भी सवाल उठाए और पूछा कि अगर इतनी गंभीर गतिविधियां चल रही थीं, तो एचआर ने क्या कदम उठाए.
कोर्ट में भीड़ पर उठाए सवाल
राणे ने यह भी कहा कि जब आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, तब 600 से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए थे. उन्होंने कहा कि उन सभी लोगों का बैकग्राउंड भी चेक किया जाना चाहिए. उन्होंने बयान दिया कि यहां आतंकियों के अंतिम संस्कार के समय भीड़ इकट्ठा होती है.
राणे ने आगे कहा कि जब अशोक खरात का मामला सामने आया तब किसी हिन्दू ने इसका समर्थन नही किया, लेकिन ऐसे मामलों में इतनी भीड़ क्यों जुट जाती है.
सियासत तेज, जांच जारी
इस मामले के सामने आने के बाद महाराष्ट्र में सियासत तेज हो गई है. एक तरफ मंत्री के बयान से बहस छिड़ गई है, तो दूसरी तरफ पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है.
राणे ने कहा कि इन विषय पर अब कोई बोल क्यों नही रह है, मैं जब भी ऐसा मुद्दा उठाता हूँ तो लोग कहते हैं की मैं दो समाज के बीच द्वेष निर्माण कर रहा हूँ. फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच पर है, जिससे यह साफ हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई होगी.

