दून का यातायात पटरी पर लाने को रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड पर बनेंगें छह इंटरचेंज
Dehradun News six interchanges will be built on Rispana-Bindal elevated road
दून यातायात व्यवस्था पटरी पर लाने को रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड पर बनेंगें छह इंटरचेंज
pm modi to lay foundation for dehradun elevated road project
देहरादून को मिलेगी 6200 करोड़ की रफ्तार, PM मोदी करेंगे रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड का शिलान्यास
देहरादून 11 अप्रैल 2026। प्रस्तावित भूमि-भवनों के स्थलीय निरीक्षण के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने संबंधित विभागों की टीम गठित कर दी है। सभी टीमें निरीक्षण का कार्य कर रही हैं।
दून की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रस्तावित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट के डिजाइन का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। बताया गया कि एलिवेटेड रोड पर छह इंटरचेंज बनाए जाएंगे। एलिवेटेड रोड के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव राजस्व विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है।
प्रस्तावित भूमि-भवनों के स्थलीय निरीक्षण को जिलाधिकारी सविन बंसल ने संबंधित विभागों की टीम गठित कर दी है। सभी टीमें निरीक्षण का कार्य कर रही हैं। वहीं, डिजाइन का प्रदर्शन कर इंजीनियर्स ने बताया कि भविष्य में यह परियोजना किस तरह आकार लेगी और किन इलाकों को लाभ मिलेगा। आज शाम चंदर रोड पर लोनिवि की ओर से रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट के प्रस्तुतिकरण को कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें लोनिवि के अधिकारियों ने डिजाइन प्रस्तुत किया। परियोजना का डिजाइन मुंबई की कंपनी स्पेक्ट्रम कंसल्टेंसी ने तैयार किया है।
डिजाइन के अलावा परियोजना के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। शहर के आर्किटेक्ट्स ने कहा कि योजना के कारण बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित करना होगा। सरकार सभी के लिए छत का इंतजाम करे। वहीं, बिजली व सीवर लाइन को भी शिफ्ट करने पर चर्चा हुई।
11 किमी लंबा होगा रिस्पना एलिवेटेड कॉरिडोर
इंजीनियर्स ने बताया कि इस कॉरिडोर की शुरुआत विधानसभा के पास रिस्पना पुल से होगी। नागल में नागल पुल पर इसका अंतिम छोर होगा। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 11 किलोमीटर होगी। मुख्य वायाडक्ट की चौड़ाई 20.2 मीटर और रैंप की चौड़ाई 6.5 मीटर होगी। इस कॉरिडोर पर सहस्रधारा चौक और आईटी पार्क रोड-धोरण पर इंटरचेंज बनाए जाएंगे। इससे आसपास के सभी इलाकों के लोगों को कॉरिडोर से कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। वाहन कॉरिडोर पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेंगें। इसकी अनुमानित लागत 2500 करोड़ रुपये तय की गई है।
बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर लंबाई 15 किमी
बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर कारगी चौक से शुरू होकर राजपुर रोड पर साईं मंदिर के पास समाप्त होगा। इसकी लंबाई 15 किमी होगी। इसमें लालपुल चौक, बिंदाल तिराहा, विजय कॉलोनी-न्यू कैंट रोड व मसूरी डायवर्जन पर इंटरचेंज दिए जाएंगे।
09 महीने में डीपीआर को अंतिम स्वरूप
प्रस्तुतिकरण देते हुए लोक निर्माण विभागीय अधिकारियों ने बताया कि परियोजना की फिजिबलिटी स्टडी पूरी हो गई है। डीपीआर का ड्राफ्ट तैयार है। इसे फाइनल करने में करीब नौ महीने लगेगे। आईआईटी रुड़की की तैयार हाइड्रोलाजिकल मॉडल स्टडी रिपोर्ट को लोनिवि के साथ साझा किया गया है। रिस्पना के फ्लड प्लेन जोनिंग को अधिसूचना जारी हो गई है। आवास व अन्य सेवाओं के शिफ्टिंग का आकलन कर लिया गया है।
दायरे में आ रहे 2000 निर्माण
रिस्पना व बिंदाल नदी के किनारों पर बसे लोगों को विस्थापित करने पर खास चर्चा हुई। यह बताया कि 103 हेक्टेयर से अधिक सरकारी और निजी भूमि के अलावा 1.2 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि भी परियोजना क्षेत्र में आ रही है। मलिन बस्तियों काे भी हटाना होगा। करीब 2000 निर्माण परियोजना क्षेत्र में आ रहे हैं।
कॉरिडोर को मसूरी तक ले जाने का भी सुझाव
आर्किटेक्ट डीएस राणा ने बताया कि उत्तराखंड आर्किटेक्ट व इंजीनियर्स एसोसिएशन को लोनिवि की ओर से कार्यशाला में शामिल होकर अपने सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया गया था। आर्किटेक्ट व इंजीनियर्स ने डिजाइन देखने के बाद उसे सराहा और कॉरिडोर को मसूरी तक ले जाने का सुझाव भी दिया, इस पर लोनिवि की ओर से कहा गया कि अभी यह पहला फेज है, अगले चरण में उस पर काम किया जाएगा।
रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड से तेज होगी देहरादून की चाल, लागत 6200 करोड़ रुपये
6200 करोड़ की परियोजना से कारगी से मालसी तक बनेगा 26 किमी लंबा एलिवेटेड मार्ग।
तेजी से फैलते शहर और बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना दून के लिए आने वाले वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण यातायात परियोजना बनकर उभर रहा है।
करीब 6200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कारिडोर रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर विकसित होगा। इसके पूरा होने पर हरिद्वार बाईपास व कारगी से मसूरी रोड तक का सफर जहां तेज होगा, वहीं शहर के मुख्य मार्गों पर लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी।
निरंतर बढ़ रही जाम की चुनौती
राजधानी दून में निरंतर बढ़ती ट्रैफिक जाम की चुनौती को दूर करने के लिए सरकार रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर तेजी से आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष बजट में इस परियोजना के लिए फौरी तौर पर 350 करोड़ रुपये का प्राविधान भी किया है। ताकि डीपीआर, सर्वे और जमीन अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई को धरातल पर आगे बढ़ाया जा सके।
क्योंकि, दोनों नदियों के प्रस्तावित कारीडोर पर बड़े स्तर पर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है व अतिक्रमण वाले हिस्सों पर रह रहे व्यक्तियों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी है। चूंकि, परियोजना का निर्माण अब एनएचएआइ करेगा, लेकिन, उन्हें जमीन खाली कर राज्य सरकार को ही मुहैया करानी है। अब आरंभिक बजटीय व्यवस्था से शुरुआती कार्यों को गति मिल सकेगी।
परियोजना के खास बिंदु
बिंदाल नदी
- शुरुआती स्थल, कारगी चौक के पास (हरिद्वार बाईपास रोड)
अंतिम स्थल, राजपुर रोड (साईं मंदिर के पास)
लंबाई, 14.8 किलोमीटर
चौड़ाई, 20.2 मीटर और रैंप 6.5 मीटर
मध्यवर्ती जंक्शन, लालपुल चौक, बिंदल तिराहा (चकराता रोड), हाथीबड़कला और मसूरी डाइवर्जन
डिजाइन स्पीड, 60 किमी प्रति घंटे
कुल लागत, 3743 करोड़ रुपए
रिस्पना नदी
शुरुआती स्थल, रिस्पना पुल (विधानसभा के पास)
अंतिम स्थल, नागल पुल (नागल)
लंबाई, 10.946 किलोमीटर
चौड़ाई, 20.2 मीटर और रैंप 6.5 मीटर
मध्यवर्ती जंक्शन, सहस्रधारा चौक और आइटी पार्क
डिजाइन स्पीड, 60 किलोमीटर प्रति घंटे
बजट, 2509 करोड़ रुपए
परियोजना क्षेत्र में आ रही भूमि और ढांचों का विवरण
बिंदाल नदी
कुल सरकारी भूमि, 33.174 हेक्टेयर
निजी भूमि, 13.96 हेक्टेयर
वन भूमि, 1.2 हेक्टेयर
स्थाई ढांचे, 560 हेक्टेयर (80 निजी भूमि पर)
अस्थाई ढांचे, 980
रिस्पना नदी
कुल सरकारी भूमि, 49.79 हेक्टेयर
निजी भूमि, 6.45 हेक्टेयर
स्थाई ढांचे, 458 (129 निजी भूमि पर)
यातायात दबाव की कसौटी पर एलिवेटेड रोड
रिस्पना नदी क्षेत्र
वर्तमान दबाव, करीब 11 हजार पीसीयू
डिजाइन क्षमता, 48 हजार पीसीयू से अधिक
बिंदाल नदी क्षेत्र
वर्तमान दबाव, 09 हजार पीसीयू
डिजाइन क्षमता, 38 हजार से अधिक पीसीयू
अधिकतम जल स्राव से 20 प्रतिशत अधिक पर डिजाइनिंग
रिस्पना और बिंदाल नदी पर बनने वाली एलिवेटेड रोड को नदी के बीचोंबीच सिंगल पिलर पर खड़ा किया जाएगा। ऐसे में इसके ढांचों की सुरक्षा के भी पक्के प्रबंध किए गए हैं।
भले ही अभी दोनों नदियों में पानी का डिस्चार्ज (स्राव) ना के बराबर हो, लेकिन यहां बीते 100 वर्षों में अधिकतम डिसचार्ज क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड के रिकार्ड को ध्यान में रखा गया है। ढांचों को अधिकतम डिसचार्ज से 20 प्रतिशत अधिक पर खड़ा किया जाएगा।
100 वर्षों में अधिकतम डिसचार्ज और डिजाइन
रिस्पना नदी
अधिकतम डिसचार्ज, डिजाइन
180 क्यूमेक्स, 216 क्यूमेक्स
बिंदाल नदी
अधिकतम डिसचार्ज, डिजाइन
136 क्यूमेक्स, 165 क्यूमेक्स
इन इलाकों को सबसे ज्यादा मिलेगी राहत
एलिवेटेड रोड बनने के बाद घंटाघर, सहारनपुर रोड, बल्लूपुर, राजपुर रोड, हरिद्वार रोड, आईएसबीटी, प्रिंस चौक और जाखन क्षेत्र में ट्रैफिक दबाव कम होने की संभावना है। खासकर मसूरी, हरिद्वार और दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर कम समय लगेगा।
व्यापार और पर्यटन को भी मिलेगा सीधा लाभ
शहर के व्यापारिक क्षेत्रों में माल ढुलाई तेज होगी और बाहरी राज्यों से आने-जाने वाले व्यावसायिक वाहनों को सुगम मार्ग मिलेगा। मसूरी और चारधाम की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए भी यात्रा आसान होगी। पर्यटन सीजन में शहर के भीतर जाम कम होने से स्थानीय कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
दून के भविष्य की ट्रैफिक रीढ़
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण नहीं, बल्कि देहरादून के भविष्य के यातायात ढांचे को नया आकार देने वाली पहल है। आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या बढ़ने के बीच यह कॉरिडोर शहर के लिए स्थायी समाधान साबित हो सकता है।
आपात सेवाओं के लिए भी बड़ी राहत
एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी आपात सेवाओं को वैकल्पिक तेज कारिडोर मिलेगा। अस्पतालों और प्रमुख संस्थानों तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होगा।
वाहनों का चार गुना दबाव झेल सकेंगी रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड
वर्ष 2051 तक के वाहन दबाव का आकलन कर बना एलिवेटेड रोड का डिजाइन
दोनों नदी क्षेत्रों में 100 वर्षों में बाढ़ की अधिकतम स्थिति को देखते हुए एलिवेटेड रोड के ढांचों को दी जाएगी मजबूती
रिस्पना और बिंदाल नदी पर बनने वाली एलिवेटेड रोड पर मौजूदा ट्रैफिक का दबाव चार गुना होने पर भी एलिवेटेड रोड पर जाम नहीं लगेगा। क्योंकि, इसे मौजूदा यातायात दबाव के चार गुना से अधिक पर डिजाइन किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार रिस्पना और बिंदाल नदी पर वाहनों का दबाव एक दिन में 09 से 11 हजार पैसेंजर कार यूनिट है। वहीं, परियोजना को 38 हजार से 48 हजार 800 पीसीयू तक पर डिजाइन किया गया है। इतने पीसीयू का दबाव वर्ष 2051 तक पहुंचने का अनुमान है। लिहाजा, परियोजना को 25-26 साल तक के यातायात दबाव को ध्यान में रखकर बनाने का निर्णय किया गया है।

