एआई युग में कौशल ही रोजगार की गारंटी
‘सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई छोड़ो, धंधा सीखो’ CEA की यूथ को सलाह
‘सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई छोड़ो, धंधा सीखो’ देश के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की यूथ को सलाह
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने दुनिया भर के नौकरी बाजार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का मानना है कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक डिग्रियां सफलता की गारंटी नहीं होंगी. उन्होंने युवाओं से ट्रेड स्किल्स और मानव-केंद्रित पेशों की ओर ध्यान देने की अपील की है. उनके अनुसार भविष्य की नौकरियों में वही लोग आगे रहेंगे, जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक और मानवीय कौशल भी होंगे.
MBA और सॉफ्टवेयर डिग्री से नहीं बनेगा भविष्य, CEA वी अनंत नागेश्वरन ने युवाओं को दी नई सलाह.
नई दिल्ली. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है. लंबे समय तक सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और MBA जैसी डिग्रियों को बेहतर करियर की कुंजी माना जाता रहा है. लेकिन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI कई पारंपरिक कार्यों को अपने हाथ में ले रही है. ऐसे में रोजगार का स्वरूप बदल रहा है और नई तरह की क्षमताओं की मांग बढ़ रही है. उनका मानना है कि युवाओं को भविष्य की जरूरतों को समझते हुए अपने कौशल को नए क्षेत्रों के अनुसार विकसित करना होगा.
ट्रेड स्किल्स को सम्मान देने की जरूरत
नागेश्वरन ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में ट्रेड स्किल्स वाले पेशों को वह सम्मान नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं. उन्होंने कहा कि वेल्डर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई और अन्य तकनीकी काम करने वाले लोग किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव होते हैं. स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों में व्यावसायिक कौशल रखने वाले लोगों को काफी सम्मान दिया जाता है. भारत में भी इस सोच को बदलने की जरूरत है ताकि युवा इन क्षेत्रों को करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हों.
ऐसे पेशे जिन्हें AI आसानी से नहीं बदल सकता
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मानवीय संवेदनाएं और व्यक्तिगत संपर्क सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. बुजुर्गों की देखभाल, विशेष जरूरतों वाले बच्चों की काउंसलिंग, अस्पतालों में सहायक सेवाएं, खेल शिक्षा, खाना बनाने की कला और अन्य सेवा क्षेत्र ऐसे उदाहरण हैं जहां इंसानी उपस्थिति की जरूरत बनी रहेगी. उनका कहना है कि AI भले ही कई तकनीकी कार्यों को आसान बना दे, लेकिन इन पेशों में मानवीय स्पर्श की जगह लेना उसके लिए आसान नहीं होगा. यही कारण है कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित और योग्य लोगों की मांग भविष्य में बढ़ सकती है.
रोजगार और रोजगारयोग्यता दोनों पर देना होगा ध्यान
नागेश्वरन ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश के सामने केवल बेरोजगारी की चुनौती नहीं है, बल्कि रोजगारयोग्यता यानी लोगों को काम के लिए तैयार करने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है. उनके अनुसार केवल नौकरियां पैदा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि युवाओं को उन नौकरियों के लिए जरूरी कौशल भी सिखाने होंगे. उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था अधिक पूंजी-आधारित होती जा रही है, जहां कई उद्योग कम लोगों को रोजगार दे पाते हैं. इसलिए श्रम-प्रधान उद्योगों और सेवाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में हैं बड़े अवसर
उन्होंने भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता मजबूत करने की सलाह भी दी. उनका मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पहले की तरह खुली नहीं रह गई है और कई देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में भारत को भी कई उत्पाद खुद बनाने होंगे. हालांकि इसके साथ-साथ श्रम-प्रधान उद्योगों और सेवा क्षेत्रों में भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. यदि इन क्षेत्रों में सही प्रशिक्षण और कौशल विकास पर ध्यान दिया जाए, तो लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी.
भविष्य की सफलता का नया फॉर्मूला
नागेश्वरन का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा. युवाओं को व्यावहारिक कौशल, संवाद क्षमता, समस्या समाधान और मानवीय समझ जैसे गुणों पर भी काम करना होगा. उनका मानना है कि वैश्वीकरण के दौर में सॉफ्टवेयर और MBA शिक्षा ने भारत को बड़ा लाभ दिया था, लेकिन अब समय बदल रहा है. AI के बढ़ते प्रभाव के बीच वही लोग अधिक अवसर हासिल कर पाएंगे, जिनके पास ऐसे कौशल होंगे जिन्हें मशीनें आसानी से नहीं दोहरा सकतीं. इसलिए भविष्य की तैयारी के लिए ट्रेड स्किल्स और सॉफ्ट स्किल्स को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है।
